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पीएम मोदी ने याद किए भाई परमानंद के बलिदान, बोले- स्वतंत्रता सेनानी ने वीर भगत सिंह को भी पढ़ाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 नवंबर को भाई परमानंद जी की जयंती पर उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, काला पानी की सजा और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अहम कार्यों को याद किया है.

PM Modi Remembers Bhai Parmanand Freedom Fighter Ghadar Party

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगामी 4 नवंबर को महान स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक भाई परमानंद जी की जन्म-जयंती के अवसर पर उनके अमूल्य योगदान को देश के सामने नमन किया है. पीएम मोदी ने उनके जीवन के कई ऐसे अनछुए पहलुओं पर रोशनी डाली है, जिनके बारे में आज की युवा पीढ़ी को जरूर जानना चाहिए. आर्य समाज से गहरे जुड़ाव रखने वाले भाई परमानंद जी के आदर्शों और उनके क्रांतिकारी सफर ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी थी.

साउथ अफ्रीका में गांधीजी से मुलाकात

बीसवीं सदी की शुरुआत में भाई परमानंद जी ने आर्य समाज के प्रचार-प्रसार के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की थी. इसी दौरान उनकी मुलाकात ‘पूज्य बापू’ यानी महात्मा गांधी से हुई थी. इसके अलावा, उन्होंने गयाना मेंजहां उस समय आर्य समाज का बड़ा केंद्र था, वहां जाकर गिरमिटिया मजदूरों के बीच भी काफी काम किया. उनका पूरा जीवन देश और समाज सेवा के लिए समर्पित था.

‘काला पानी’ की सजा

स्वतंत्रता आंदोलन में भाई परमानंद जी की भूमिका बेहद अहम रही है. इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो यह भी सामने आता है कि उन्होंने ही लाला हरदयाल जी को अमेरिका जाने के लिए प्रेरित किया था. वे देश की आजादी के लिए लड़ने वाली प्रसिद्ध ‘गदर पार्टी’ के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. अंग्रेजों की आंखों में वे इतने खटकने लगे थे कि उन्हें अंडमान की कुख्यात जेल यानी ‘काला पानी’ की सजा सुनाई गई. अपनी आत्मकथा ‘आप्बेती: काले पानी की करवास कहानी’ में उन्होंने उस दौर की भयानक यातनाओं और संघर्षों का बहुत ही मार्मिक जिक्र किया है, जो हर देशवासी को जरूर पढ़नी चाहिए.

भगत सिंह को दी शिक्षा

कठिन कारावास की सजा काटने के बाद जब वे वापस लौटे, तो उन्होंने अपना पूरा ध्यान शिक्षा के प्रसार पर लगा दिया. यह जानकर हैरानी होगी कि उन्होंने महान क्रांतिकारी वीर भगत सिंह को भी पढ़ाया था. जीवन के बाद के सालों में वे लंबे समय तक हिंदू Mahasabha से भी जुड़े रहे. प्रधानमंत्री मोदी के इस संस्मरण से देश के एक ऐसे गुमनाम नायक का इतिहास फिर से ताजा हो गया है, जिनके त्याग और बलिदान की बदौलत आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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