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‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के 11 साल पूरे, पीएम मोदी ने गर्व से कहा- बेटियां बना रही नए रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के 11 साल पूरे होने पर देश की बेटियों की उपलब्धियों की सराहना की है. 22 जनवरी 2015 को शुरू हुई इस योजना ने न केवल लिंगानुपात (SRB) में सुधार किया है, बल्कि माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के नामांकन को भी 78% तक पहुंचाया है.

PM Modi on 11 years of Beti Bachao Beti Padhao abhiyan

आज केंद्र सरकार के ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान को पूरे 11 साल हो गए है. इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की बेटियों पर गर्व करते हुए कहा कि आझ वो हर क्षेत्र में नाम कमा रही.

हर क्षेत्र में बना रही नए रिकॉर्ड: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कन्या को लक्ष्मी मानने वाले हमारे देश में 11 साल पहले आज ही के दिन ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत हुई थी. यह बड़े गर्व की बात है कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नित-नए रिकॉर्ड बना रही हैं.”

पीएम मोदी ने एक सुभाषित शेयर करते हुए लिखा, “दशपुत्रसमा कन्या दशपुत्रान् प्रवर्धयन्. यत् फलम् लभते मर्त्यस्तल्लभ्यं कन्ययैकया.”

योजना को शुरू करने का उद्देश्य?

‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को की गई. इसका उद्देश्य महिला-पुरुष के आधार पर चयन को रोकना, बालिकाओं के अस्तित्व व सुरक्षा को सुनिश्चित करना और बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करना है. यह केंद्र सरकार की शत-प्रतिशत वित्तपोषित योजना है और इसे देश के सभी जिलों में चलाया जा रहा है.

‘बेटी बचाओ-बेटी पढाओ’ अभियान ने पिछले वर्षों में सफलतापूर्वक राष्ट्रीय चेतना में जगह बनाई. इस अभियान ने समुदायों, सरकारी एजेंसियों, नागरिक समाज और मीडिया को लड़कियों के हक में सहायक और न्यायसंगत वातावरण को बढ़ावा देने के लिए एक साथ काम करने के लिए संगठित किया.

लिंगानुपात में हुई बढ़ोतरी

इस कार्यक्रम ने जन्म के समय महिला-पुरुष अनुपात (SRB) में सुधार, बालिका शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और लड़कियों तथा महिलाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति भी हासिल की है.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के ‘एचआईएमआईएस’ के आंकड़ों के अनुसार, देश में जन्म के समय लिंगानुपात साल 2014-15 में 918 था, जो 2024-25 में बढ़कर 929 तक पहुंचा. वहीं, शिक्षा मंत्रालय के यूडीआईएसई के आंकड़ों के मुताबिक, माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का सकल नामांकन अनुपात 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत तक पहुंचा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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