PM Modi Gujarat Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भगवान महावीर जयंती के पावन अवसर पर गुजरात के गांधीनगर स्थित कोबा तीर्थ में एक भव्य कार्यक्रम में शिरकत की. यहां उन्होंने ‘सम्राट संप्रति संग्रहालय’ का उद्घाटन किया और एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पिछली सरकारों पर जमकर निशाना साधा.
सुधार रहे पुरानी गलतियां
पीएम मोदी ने बड़े ही बेबाक अंदाज में कहा कि दशकों तक देश की अनमोल विरासत और प्राचीन पांडुलिपियों की अनदेखी की गई, लेकिन अब उनकी सरकार उन पुरानी गलतियों को सुधारने का काम कर रही है. प्रधानमंत्री ने साफ किया कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर अब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसे आधुनिक तकनीक के जरिए अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा.
सम्राट संप्रति का शासन
जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सबसे पहले भगवान महावीर के चरणों में नमन किया और देशवासियों को महावीर जयंती की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने जैन संतों की जमकर तारीफ की जिन्होंने इस ‘जैन हेरिटेज म्यूजियम’ की कल्पना की थी. पीएम ने कहा कि इतिहास गवाह है कि जहां कुछ शासकों ने सिर्फ हिंसा के दम पर राज किया, वहीं सम्राट संप्रति ने सिंहासन पर बैठकर अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह का विस्तार किया.
Speaking at the inauguration of the Samrat Samprati Museum in Gandhinagar. It showcases the deep-rooted traditions of the Jain culture and its timeless values for humanity. https://t.co/yo1XszOIza
— Narendra Modi (@narendramodi) March 31, 2026
पीएम मोदी ने आगे कहा कि निस्वार्थ भाव से शासन को सेवा का माध्यम मानना हमें अपने गौरवशाली अतीत से ही सीखने को मिलता है. यह संग्रहालय अब जैन दर्शन और भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पवित्र केंद्र बन गया है जो आने वाली सदियों तक लोगों को प्रेरणा देता रहेगा.
पांडुलिपियों का संरक्षण
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पुरानी सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले की सरकारों ने भारत की बहुमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण में घोर लापरवाही बरती थी. उन्होंने कहा कि इसी ऐतिहासिक भूल को सुधारने के लिए उनकी सरकार ने ‘ज्ञान भारतम मिशन’ की शुरुआत की है.
इस मिशन के तहत अब प्राचीन पांडुलिपियों का सिर्फ रखरखाव ही नहीं हो रहा, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर उनका डिजिटलीकरण किया जा रहा है. उच्च गुणवत्ता वाली स्कैनिंग और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके इन धरोहरों को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाया जा रहा है ताकि हमारा प्राचीन ज्ञान कभी विलुप्त न हो सके.
राष्ट्र निर्माण के लिए पीएम के ’10 संकल्प’
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने देशवासियों के सामने दस बड़े संकल्प भी रखे जिन्हें वे राष्ट्र निर्माण के लिए बेहद जरूरी मानते हैं. उन्होंने पानी बचाने, ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने, स्वच्छता अभियान को जारी रखने और ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने पर जोर दिया.
इसके अलावा उन्होंने देश दर्शन, प्राकृतिक खेती, स्वस्थ जीवनशैली, योग, गरीबों की सहायता और भारत की विरासत को संजोने का आह्वान किया. प्रधानमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि भारत में ज्ञान हमेशा से एक मुक्त प्रवाह रहा है और हर युग में ऋषियों-मनीषियों ने इसे समृद्ध किया है, इसलिए अब यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम इस धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएं.
-भारत एक्सप्रेस
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