सिक्किम की हसीन वादियों और कंचनजंगा की छांव में इन दिनों केवल राजनीति की हलचल नहीं है, बल्कि वहां अनुभवों और ज्ञान का एक अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है. सोमवार की शाम गंगटोक में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम के उन ‘असली हीरो’ के साथ वक्त बिताया, जिन्होंने अपनी मेहनत और काबिलियत से समाज में एक अलग मुकाम हासिल किया है.
सरकारी बैठक नहीं, बल्कि दिल की बातें
प्रधानमंत्री ने गंगटोक के अपने दौरे के दौरान पद्म पुरस्कार विजेताओं और विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों के साथ एक खास मुलाकात की. ये कोई औपचारिक सरकारी बैठक नहीं थी, बल्कि एक ऐसी चर्चा थी जहां दिल से बातें निकलीं और अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ.
जमीन से जुड़े सितारों ने साझा किए अपने सपने
अक्सर हम टीवी पर पद्म पुरस्कार समारोह देखते हैं, लेकिन उन पुरस्कार विजेताओं के पास देश के विकास को लेकर क्या विजन है, ये जानना बेहद दिलचस्प होता है. गंगटोक में हुई इस बैठक में कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया.
In Gangtok earlier this evening, interacted with Padma awardees and people who have distinguished themselves in different fields. It was wonderful discussing a wide range of issues. pic.twitter.com/ezJmrfhPKE
— Narendra Modi (@narendramodi) April 27, 2026
प्रधानमंत्री ने खुद इस मुलाकात को ‘अद्भुत अनुभव’ बताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी साझा करते हुए लिखा कि इन दिग्गजों के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करना वाकई प्रेरणादायक रहा.
भविष्य की ‘ब्लूप्रिंट’ पर बात
इस मुलाकात का सबसे अहम पहलू ये था कि प्रधानमंत्री केवल इन दिग्गजों को सुनने नहीं, बल्कि उनके सुझावों को अपनी नीतियों का हिस्सा बनाने के इरादे से वहां मौजूद थे. चर्चा के दौरान सांस्कृतिक संरक्षण (Cultural Preservation) से लेकर नवाचार (Innovation) और सामाजिक सुधारों तक, हर छोटे-बड़े मुद्दे पर खुलकर बात हुई.
गंगटोक के स्थानीय लोगों के लिए ये गर्व का क्षण था कि उनके बीच से निकले इन विशेषज्ञों की राय को देश के प्रधानमंत्री इतनी अहमियत दे रहे हैं.
पूर्वोत्तर भारत की बढ़ती धमक
प्रधानमंत्री का ये दौरा और सिक्किम के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ उनकी ये आत्मीय चर्चा, केंद्र सरकार के पूर्वोत्तर (North-East) के प्रति लगाव को और मजबूती देती है. सिक्किम जैसे छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य के विशेषज्ञों के अनुभवों को राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल करना, ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को हकीकत में बदलने जैसा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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