आज के दिन पूरी दुनिया ‘गुड फ्राइडे’ मना रही है. ये दिन ईसा मसीह (जीसस क्राइस्ट) के उस सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने मानवता के लिए प्रेम, करुणा और क्षमा की एक नई परिभाषा लिखी थी. भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहां हर धर्म के मूल्यों का सम्मान किया जाता है, आज के दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है. इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यीशु के जीवन दर्शन को याद करते हुए देशवासियों के बीच शांति और सद्भाव का संदेश दिया.
यीशु मसीह के बलिदान को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा, ‘गुड फ्राइडे हमें यीशु मसीह के बलिदान की याद दिलाता है. ये दिन सद्भाव, करुणा और क्षमा के मूल्यों को और भी गहरा करे. भाईचारा और आशा हम सभी का मार्गदर्शन करें.’
क्या है गुड फ्राइडे?
ईसाई मान्यताओं के अनुसार, आज ही के दिन यीशु को सूली पर चढ़ाया गया था. भले ही ये दिन दुख और शोक का प्रतीक है, लेकिन इसे ‘गुड’ (शुभ) इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये मानवता की मुक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत की नींव रखता है. वे मूल्य जिनकी आज की भागदौड़ भरी दुनिया में सबसे ज्यादा जरूरत है.
ऐसे में गुड फ्राइडे का ये अवसर सामाजिक समरसता को और मजबूती देता है. ईसा मसीह ने सूली पर चढ़ते समय भी अपने विरोधियों के लिए प्रार्थना की थी, जो हमें सिखाता है कि नफरत का जवाब केवल प्रेम से ही दिया जा सकता है.
देशभर में प्रार्थना सभाओं का दौर
गुड फ्राइडे के मौके पर आज सुबह से ही देश के तमाम चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जा रही हैं. केरल के पुराने गिरजाघरों से लेकर गोवा के बेसिलिका और दिल्ली-मुंबई के कैथेड्रल्स तक, भक्त मौन रहकर और उपवास रखकर प्रभु यीशु के कष्टों को याद कर रहे हैं. कई जगहों पर ‘क्रॉस की यात्रा’ (Way of the Cross) भी निकाली जा रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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