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केंद्र की मोदी सरकार के गौरवशाली 12 साल पूरे होने पर देश भर से प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है. आम जनता से लेकर देश के प्रतिष्ठित संत समाज और खेल-योग जगत की हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कार्यकाल को भारत के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बताया है. लोगों का मानना है कि इन 12 वर्षों में देश ने न सिर्फ बुनियादी ढांचे और तकनीक में लंबी छलांग लगाई है, बल्कि भारत की खोई हुई सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को भी नया जीवन मिला है.
अयोध्या से केदारनाथ तक… सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर
धार्मिक और आध्यात्मिक मोर्चे पर मोदी सरकार के कामों की सराहना करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बेहद महत्वपूर्ण बातें कहीं. उन्होंने कहा कि राजनीति में अलग-अलग लोगों के देखने का नजरिया अलग हो सकता है, लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि पिछले 12 सालों में भारत की सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान को जो वैश्विक प्रतिष्ठा मिली है, वह अभूतपूर्व है.
उन्होंने केदारनाथ का उदाहरण देते हुए बताया कि अब वहां आने वाले भक्तों की सुरक्षा और सुविधा का इतना ध्यान रखा जाता है कि अगर कोई यात्री गलती से बिना गर्म कपड़ों के पहुंच जाए, तो प्रशासन तुरंत उसके लिए जैकेट, जूते और दस्ताने जैसी चीजों का इंतजाम कर देता है.
जनकल्याण को समर्पित: महंत एनवी स्वामी
इसी तरह रायगंज स्थित स्वामी नारायण मंदिर के महंत एनवी स्वामी ने भी अयोध्या में खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मोदी सरकार का ये कार्यकाल पूरी तरह से जनकल्याण को समर्पित रहा है. विकास सिर्फ शहरों या बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर देश के सुदूर गांवों में भी दिख रहा है. गांव-गांव तक बिजली पहुंचाना, ‘नल से जल’ योजना के जरिए हर घर तक साफ पानी देना, महिलाओं का सशक्तिकरण करना और स्वास्थ्य-शिक्षा के नए संस्थान खोलना इस बात का सबूत है कि सरकार ने हर वर्ग का ध्यान रखा है.
अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि इन 12 वर्षों में देश ने राम मंदिर निर्माण जैसी ऐतिहासिक उपलब्धि तो हासिल की ही, साथ ही नक्सलवाद और आंतरिक सुरक्षा जैसी दशकों पुरानी जटिल समस्याओं पर भी काफी हद तक काबू पाया है.
कुरान का अध्ययन और गोवंश की रक्षा पर बड़ा संदेश
बातचीत के दौरान स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने समाज में आपसी सौहार्द को लेकर उन मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध लोगों की खुलकर तारीफ की, जो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का समर्थन कर रहे हैं. संस्कृत की प्रसिद्ध कहावत ‘गावो विश्वस्य मातरः’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गाय हमारी संस्कृति का मूल आधार है.
उन्होंने खुद कुरान का हिंदी और संस्कृत अनुवाद सहित कई बार गहराई से अध्ययन किया है और वे पूरे दावे के साथ कह सकते हैं कि उसमें कहीं भी गोवंश की हत्या का समर्थन नहीं मिलता. महाराज ने दोटूक कहा कि जो लोग धर्म की आड़ में हिंसा या गोवंश को नुकसान पहुंचाते हैं, वे असल में अपने ही धर्म के मूल सिद्धांतों और करुणा की भावना को नहीं समझते. सभी धर्मों का अंतिम लक्ष्य मानवता और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करना ही है.
सबका साथ, सबका विकास PM Modi का असली ‘योग’
पद्मश्री भारत भूषण ने बताया कि 12 घंटे के भीतर तो सूर्य भी अपनी दिशा बदल देता है और दुनिया में उजाला कर देता है, फिर ये तो देश के विकास के 12 साल हैं, जिसका बदलाव हर तरफ साफ-साफ महसूस किया जा सकता है.
आज देश में सड़कों का जो शानदार जाल बिछा है, चिकित्सा और कृषि के क्षेत्र में जो तरक्की हुई है, और मंगल ग्रह तक जो भारत ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, उसने वैज्ञानिकों के भीतर एक नया आत्मविश्वास भर दिया है.
भारत उम्मीद की किरण
भारत भूषण ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने योग को जिस तरह से वैश्विक मंच पर स्थापित किया है, वह उनकी सबसे बड़ी जीतों में से एक है. आज जब पूरी दुनिया युद्ध के मुहाने पर खड़ी है, तब वह भारत की तरफ उम्मीद की एक नई किरण के साथ देख रही है.
इसके अलावा, उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘उज्ज्वला योजना’ जैसी योजनाओं की सफलता की तारीफ करते हुए कहा कि आज भारत में दुनिया का सबसे तेज डिजिटलीकरण हुआ है.
-भारत एक्सप्रेस
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