राजधानी के भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) के दौरान भारत की कूटनीति अपने चरम पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने शनिवार को सम्मेलन से इतर इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली (Abiy Ahmed Ali) और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (Anwar Ibrahim) के साथ अलग-अलग उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकें कीं. इन बैठकों में रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और तकनीकी साझेदारियों को लेकर कई बड़े और अहम फैसले लिए गए हैं.
मलेशिया के साथ सेमीकंडक्टर पर बड़ा कदम
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ हुई बैठक में दोनों नेताओं ने इसी साल फरवरी 2026 में पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान हुए समझौतों की प्रगति की समीक्षा की. प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने मलेशिया के कोटा किनाबालु (Kota Kinabalu, Sabah) में भारत का नया वाणिज्य दूतावास (Consulate General) खोलने के लिए अपनी सहमति जता दी है. दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, डिजिटल अर्थव्यवस्था, फिनटेक, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सार्थक चर्चा हुई है.
इथियोपिया ने खोले खनन कंपनियों के लिए दरवाजे
इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में इथियोपिया की सक्रिय भागीदारी की जमकर सराहना की. पीएम ने कहा कि इथियोपिया की उपस्थिति ने ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की सामूहिक आवाज को और अधिक मजबूत किया है.
इथियोपिया ने भारत के साथ मजबूत रक्षा सहयोग और निवेश के लिए गहरी उत्सुकता दिखाई है. विशेष रूप से, इथियोपिया ने भारतीय खनन (Mining) कंपनियों के लिए अपने देश के द्वार खोलने का खुला ऐलान किया है, जिससे भारतीय उद्योगों को अफ्रीकी बाजार में एक नया पंख मिलेगा.
‘मानवता सर्वोपरि’ का दृष्टिकोण
भारत आज से नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. इस साल की ब्रिक्स अध्यक्षता ‘लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ थीम पर आधारित है, जो प्रधानमंत्री मोदी के “मानवता सर्वोपरि” (Humanity First) के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से रखती है.
ब्रिक्स मंच से सामने आए इन कूटनीतिक परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ आर्थिक और सामरिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. आने वाले दिनों में इन समझौतों के भारत के पक्ष में बेहद दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे.
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