PM Modi and President Lee’s Talks: दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता में नरेंद्र मोदी ने भारत-कोरिया आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ अकाउंट में जानकारी साझा करते हुए लिखा, “भारत-कोरिया व्यापारिक नेताओं के संवाद ने विभिन्न क्षेत्रों में हमारी आर्थिक साझेदारी की अपार संभावनाओं को उजागर किया. हमारा सहयोग दोनों देशों में विकास और समृद्धि को गति प्रदान कर सकता है.”
आपूर्ति और युवाओं के लिए अवसर
पीएम ने पोस्ट में आगे लिखा, “हमारा मुख्य ध्यान आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने, भविष्य के लिए तैयार क्षेत्रों को समर्थन देने और हमारे युवाओं के लिए अवसर सृजित करने पर केंद्रित है.” इस दौरान राष्ट्रपति ली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर दिल्ली में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत, उत्तर प्रदेश के राजकीय वृक्ष सीता अशोक का पौधा रोपित किया.
The India-Korea Business Leaders’ Dialogue highlighted the immense potential of our economic partnership across diverse sectors. Our cooperation can drive growth and prosperity in both nations.
Our focus remains on strengthening supply chains, supporting future-ready sectors and… pic.twitter.com/SZgKMnWflF
— Narendra Modi (@narendramodi) April 20, 2026
समुद्री लॉजिस्टिक्स में सहयोग
भारत की राजकीय यात्रा के अवसर पर भारत के पीएम मोदी और कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच हुई बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने जहाज निर्माण, शिपिंग और समुद्री लॉजिस्टिक्स में साझेदारी के लिए अपनी सरकारी एजेंसियों और निजी संस्थाओं के बीच आपसी लाभकारी सहयोग पर सार्थक और गहन विचार-विमर्श किया.
भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही समृद्ध समुद्री परंपराओं वाले राष्ट्र हैं, और समुद्री उद्योगों के क्षेत्र में उनके व्यापक साझा हित और पूरक ताकतें हैं. भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि और उसकी अर्थव्यवस्था के अंतरराष्ट्रीयकरण के साथ, समुद्री क्षेत्र भारत की सुरक्षा और समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
मैरीटाइम अमृत काल 2047 विजन
दोनों पक्षों ने माना कि ‘मैरीटाइम अमृत काल 2047 विजन’ के तहत भारत की समुद्री योजनाओं ने दक्षिण कोरिया जैसे दोस्त देश के साथ लंबे समय तक सहयोग के कई नए मौके पैदा किए हैं. दक्षिण कोरिया जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र में काफी आगे है, इसलिए दोनों देश मिलकर शिपबिल्डिंग, बंदरगाह विकास और समुद्री लॉजिस्टिक्स में काम कर सकते हैं. इससे न सिर्फ आर्थिक फायदा होगा, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच समझ और साझेदारी भी और मजबूत होगी.
शिपबिल्डिंग क्लस्टर और तकनीकी भागीदारी
भारतीय पक्ष ने कोरिया को बताया कि भारत में बड़े स्तर पर नए (ग्रीनफील्ड) शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने के अच्छे मौके हैं. इसके लिए सरकार की ‘जहाज निर्माण विकास योजना’ और राज्य सरकारों व भारतीय वित्तीय संस्थानों की तरफ से कई तरह की सुविधाएं और प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं. भारत ने कोरिया की बड़ी शिपबिल्डिंग कंपनियों को इन प्रोजेक्ट्स में टेक्निकल और स्ट्रैटेजिक पार्टनर के तौर पर शामिल होने का न्योता दिया, ताकि डिजाइन, उत्पादन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, क्वालिटी और सेफ्टी जैसे क्षेत्रों में उनका अनुभव काम आ सके.
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