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बीकानेर की महाजन रेंज में अमेरिकी फौज का पड़ाव, जानिए कौन-सी आधुनिक तकनीकें होंगी टेस्ट?

Defense News: बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका का 22वां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2026’ शुरू हो चुका है, जिसमें 1200 सैनिक आधुनिक ड्रोन और बहु-क्षेत्रीय तकनीकों का परीक्षण कर रहे हैं.

युद्ध अभ्यास 2026 - बीकानेर में भारत और अमेरिकी सेना का संयुक्त अभ्यास

बीकानेर के महाजन में 'युद्ध अभ्यास-2026' के तहत आधुनिक तकनीकों का अभ्यास करते भारत और अमेरिकी सैनिक. (PC: भारत एक्सप्रेस)

Bikaner News: साहिल/बीकानेर: राजस्थान के बीकानेर में रेगिस्तान की तपती रेत के बीच भारत और अमेरिका के रिश्ते और मजबूत हो रहे हैं. राजस्थान के बीकानेर स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में 22वां संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2026’ आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है. इस अभ्यास में दोनों देशों के सैनिक आधुनिक तकनीकों और घातक रणनीतियों का आदान-प्रदान कर रहे हैं.

बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और अमेरिका का 22वां ‘युद्ध अभ्यास-2026’ शुरू हुआ है. 1200 सैनिकों की भागीदारी वाले इस अभ्यास में अलास्का की 11वीं एयरबोर्न डिवीजन भी शामिल है. अभ्यास का मुख्य फोकस आधुनिक ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियों, निगरानी तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्ध रणनीतियों के आदान-प्रदान पर है.

महाजन में जुटा 1200 सैनिकों का दल

बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित इस अभ्यास में दोनों देशों के लगभग 1200 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. अमेरिकी सेना की ओर से ‘आर्कटिक एंजल्स’ के नाम से मशहूर 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की पहली इन्फेंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम मैदान में उतरी है, जिसका नेतृत्व कर्नल बेंजामिन जैकमैन कर रहे हैं. अलास्का के फोर्ट वाइनराइट मुख्यालय वाली यह डिवीजन अत्यधिक कठोर और दुर्गम मौसम में सटीक सैन्य अभियानों के लिए दुनिया भर में पहचानी जाती है.

आधुनिक युद्ध और ड्रोन तकनीक पर विशेष जोर

इस बार के अभ्यास में पारंपरिक तरीकों से इतर बदलते युद्धक्षेत्र की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है. सैनिक आधुनिक हथियार प्रणालियों, सटीक निगरानी, टोह लेने और तेजी से फैसले लेने का अभ्यास कर रहे हैं. आधुनिक युद्धों में मानवरहित प्रणालियों की महत्ता को देखते हुए ड्रोन और स्वायत्त तकनीकों के माध्यम से लक्ष्य की पहचान और खुफिया जानकारी जुटाने का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

बहु-क्षेत्रीय क्षमता और तकनीकी अनुभवों का आदान-प्रदान

अभ्यास में थल, नभ, साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित करने पर बल दिया जा रहा है. अमेरिकी सेना के तीसरी बहु-क्षेत्रीय कार्यबल की भागीदारी के साथ, दोनों सेनाएं अपनी रणनीति और प्रक्रियाओं के अनुभव साझा कर रही हैं. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की दृष्टि से यह सैन्य सहयोग बेहद अहम माना जा रहा है.

2004 से लगातार मजबूत होता सैन्य रिश्ता

वर्ष 2004 में शुरू हुआ ‘युद्ध अभ्यास’ अब पारंपरिक प्रशिक्षण से काफी आगे बढ़ चुका है. रेगिस्तानी इलाकों में आधुनिक हथियारों और तकनीकों का यह परीक्षण दोनों देशों के रक्षा संबंधों को एक नई सामरिक दिशा दे रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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