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‘प्राण, धन, बुद्धि और वाणी… सब परोपकार में लगा दो!’ पीएम मोदी द्वारा साझा किये श्लोक के क्या हैं मायने?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत सुभाषित के जरिए मानव जीवन की सार्थकता और समाज के प्रति सेवा व परोपकार के महत्व को रेखांकित किया. श्लोक में प्राण, धन, बुद्धि और वाणी जैसी शक्तियों का इस्तेमाल दूसरों के कल्याण के लिए करने का संदेश दिया गया है.

PM Modi

PM मोदी ने शेयर किया संस्कृत सुभाषित

PM Modi Sanskrit Shlok: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भारतीय ज्ञान परंपरा, सनातन संस्कृति और नैतिक मूल्यों से ओत-प्रोत एक पावन संस्कृत सुभाषित साझा किया है. इस विशेष संदेश और वीडियो के जरिए प्रधानमंत्री ने न केवल मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता को रेखांकित किया है, बल्कि देश और दुनिया के सामने सेवा, समर्पण तथा निष्काम परोपकार का एक महान विचार भी प्रस्तुत किया है.

बता दें प्रधानमंत्री मोदी का यह प्रयास उनकी उस निरंतर सोच का हिस्सा है, जिसके तहत वे समय-समय पर प्राचीन भारतीय शास्त्रों और सुभाषितों के माध्यम से आधुनिक समाज को सकारात्मकता, नैतिक मूल्यों और जन-सेवा की ओर प्रेरित करते रहते हैं.

पीएम मोदी द्वारा साझा किए गए श्लोक का अर्थ(PM Modi Sanskrit Shlok)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जिस श्लोक को साझा किया है, वह मानव जीवन के मूल आधार और उसके कर्तव्यों को स्पष्ट करता है. सुभाषित इस प्रकार है:

‘एतावज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु।

प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय एवाचरेत्सदा॥’

इस कालजयी श्लोक का सरल और गहरा अर्थ यह है कि इस नश्वर संसार में मनुष्य के रूप में जन्म लेने की पूर्ण सार्थकता और सफलता केवल इसी में निहित है कि व्यक्ति अन्य सभी प्राणिमात्र के प्रति अपने प्राण (शारीरिक शक्ति व सामर्थ्य), अर्थ (धन-संपत्ति), धिया (बुद्धि व ज्ञान) और वाचा (वाणी व मधुर शब्दों) के माध्यम से सदैव परोपकार, कल्याण और सेवा से भरे कर्मों का ही संपादन करे. ईश्वर से मिली इन चार शक्तियों का उपयोग अगर समाज हित में न हो, तो जीवन अधूरा ही रह जाता है.

 


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भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक पटल पर लाने का प्रयास

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से भारतीय शास्त्रों, संस्कृत भाषा और सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा के प्रबल समर्थक रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मंचों से लेकर अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ और सोशल मीडिया तक, वे लगातार ऐसे श्लोकों और प्रसंगों को सामने लाते रहते हैं जो आम जनमानस में नैतिक चेतना जगाते हैं.

पीएम मोदी का मानना है कि आज के आधुनिक और तेजी से बदलते युग में भी भारत के प्राचीन ग्रंथ और सुभाषित पूरे विश्व को शांति, सहअस्तित्व और भलाई का मार्ग दिखा सकते हैं. पीएम मोदी द्वारा साझा किए गए इस सुभाषित वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर लाखों लोगों द्वारा देखा और पसंद किया जा रहा है, और लोग इसे समाज को सही दिशा दिखाने वाला एक बेहद प्रेरणादायक कदम बता रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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