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‘निःस्वार्थ कर्म ही मानवता की बड़ी शक्ति…’ पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक साझा कर देश को दिया सेवा का नया मंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संस्कृत श्लोक साझा कर निःस्वार्थ सेवा, जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण को जीवन का सर्वोच्च आदर्श बताया. उन्होंने कहा कि सभी प्राणियों के हित में किया गया कर्म ही सच्ची ईश्वर भक्ति और सफलता का मूल मंत्र है…

PM Modi Sanskrit Shloka: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देशवासियों के नाम एक और बेहद प्रेरक, विचारणीय और आध्यात्मिक संदेश साझा किया है. पीएम मोदी ने समाज और राष्ट्र को निःस्वार्थ कर्म और सेवा भाव की असली ताकत का अहसास कराने के लिए एक प्राचीन और शक्तिशाली संस्कृत श्लोक प्रस्तुत किया है. प्रधानमंत्री ने साफ लफ्जों में कहा है कि निःस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही मानवता की सबसे बड़ी ताकत है.

सरकार आज सेवा और समर्पण के इसी अटूट भाव के साथ देश के हर नागरिक के जीवन को बेहतर और सुगम बनाने का संकल्प लेकर लगातार आगे बढ़ रही है. प्रधानमंत्री का यह संदेश इंटरनेट पर आते ही देश भर में सेवा भावना और जन कल्याण को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई प्रेरणा दे रहा है.

 

संस्कृत श्लोक के मायने क्या?(PM Modi Sanskrit Shloka)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विशेष संबोधन में एक महान प्राचीन संस्कृत श्लोक का उल्लेख करते हुए साझा किया-‘हितं यत्सर्वभूतानामात्मानश्च सुखावहम्. तत्कुर्यादीश्वरे ह्येतन्मूलं सर्वार्थसिद्धये..’ इस कालजयी श्लोक का मर्म और गहरा सार देशवासियों को समझाते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि जो कार्य संसार के समस्त प्राणियों के लिए हितकारी हों और जिसे करने से अपनी अंतरात्मा को सच्ची शांति और सुख प्राप्त हो, असल में वही ईश्वर के प्रति हमारा सच्चा समर्पण है. पीएम मोदी के मुताबिक, यही वह मूल मंत्र और आधार है जो मनुष्य को जीवन में सभी प्रकार की सफलताओं और सिद्धियों के चरम तक ले जाता है.

‘राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा संकल्प

अपने इस प्रेरणादायी संदेश (PM Modi Sanskrit Shloka) में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सेवा’ को सर्वोपरि और सबसे बड़ा धर्म बताया है. उन्होंने मजबूती से रेखांकित किया कि सरकार का हर एक प्रयास जन कल्याण, राष्ट्र निर्माण तथा देश के अंतिम छोर पर बैठे हर नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए पूरी तरह समर्पित है.

प्रधानमंत्री के अनुसार, जब नीति और नीयत साफ हो, तो सेवा का हर छोटा प्रयास भी देश को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है. यह विचार एक तरह से पूरे देश को याद दिलाता है कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नींव हमेशा से दूसरों की भलाई और निस्वार्थ सेवा पर ही टिकी रही है.

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‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह नया विचार केंद्र सरकार के मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना को वैचारिक रूप से और ज्यादा मजबूत करता है. युवाओं और सामाजिक संगठनों के बीच इस संदेश को राष्ट्र सेवा के एक बड़े संकल्प के रूप में देखा जा रहा है. इस डिजिटल ड्राफ्ट से यह साफ संदेश मिलता है कि देश की प्रगति तभी मुमकिन है जब समाज का हर व्यक्ति अपने दायित्वों को पूरी ईमानदारी और निस्वार्थ भाव से निभाए. विपरीत और कठिन परिस्थितियों के बीच भी जनसेवा के संकल्प से पीछे न हटना ही नए भारत की सबसे बड़ी और असली पहचान बन चुका है.

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-भारत एक्सप्रेस



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