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पीएम मोदी का ‘साहस मंत्र’: एक अकेला सिंह भी हजारों हाथियों पर भारी, सुभाषित के जरिए देश को दिया जीत का गुरुमंत्र!

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संस्कृत सुभाषित के जरिए साहस और आत्मविश्वास का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि मजबूत संकल्प वाला व्यक्ति अकेले भी बड़ी से बड़ी चुनौतियों को पार कर सकता है…

PM Modi courage message Sanskrit subhashit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक शक्तिशाली संस्कृत सुभाषित साझा किया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. पीएम मोदी ने इस श्लोक के जरिए संदेश दिया कि जिस व्यक्ति के पास साहस और अटूट संकल्प है, उसके लिए दुनिया में ‘असंभव’ शब्द का कोई अस्तित्व नहीं है. प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति वह चाबी है, जिससे जीवन की सबसे कठिन चुनौतियों के ताले भी खोले जा सकते हैं.

मोदी के सुभाषित के क्या हैं मायने?

प्रधानमंत्री ने जो श्लोक साझा किया है कि ‘एकोऽपि सिंहः साहस्रं यूथं मथ्नाति दन्तिनाम्’ उसका अर्थ बेहद गहरा और प्रभावी है. इसका भाव यह है कि जिस तरह एक अकेला सिंह अपने साहस के बल पर हजारों हाथियों के झुंड को तितर-बितर कर देता है, उसी तरह एक साहसी व्यक्ति अपनी शक्ति को पहचानकर बड़ी से बड़ी बाधाओं को पार कर सकता है. पीएम मोदी ने इस सुभाषित के जरिए देशवासियों, विशेषकर युवाओं को यह बताने की कोशिश की है कि संख्या बल या संसाधनों की कमी मायने नहीं रखती, अगर आपके भीतर खुद को ‘सिंह’ जैसा उदार और पराक्रमी देखने की दृष्टि है.

आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति से पार होगी हर बाधा

पीएम मोदी ने इस पोस्ट के साथ अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा कि साहस और संकल्प से भरा व्यक्ति कभी हार नहीं मानता. प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है. पीएम अक्सर अपने भाषणों में भी ‘कैन डू’ (Can-Do) एटीट्यूड की बात करते हैं और आज का यह सुभाषित उसी सोच को और मजबूती प्रदान करता है. उनके इस ट्वीट को लोग एक ‘मोटिवेशनल डोज’ की तरह देख रहे हैं, जो जीवन की आपाधापी में निराश लोगों के भीतर नई ऊर्जा भरने का काम कर रहा है.

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सुभाषितम: विरासत से आधुनिक भारत को जोड़ते पीएम

यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री ने प्राचीन ज्ञान का सहारा लिया हो. पीएम मोदी का सुभाषित शेयर करना उनकी उस कार्यशैली का हिस्सा है, जिसमें वे भारतीय संस्कृति और संस्कारों को राष्ट्र के उत्थान का आधार मानते हैं. जानकारों का मानना है कि इस तरह के संदेशों के जरिए पीएम मोदी न केवल संस्कृत भाषा के प्रति सम्मान बढ़ा रहे हैं, बल्कि सदियों पुराने ज्ञान को आज की नई पीढ़ी के लिए प्रासंगिक भी बना रहे हैं. उनकी इस पोस्ट पर हजारों लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘सफलता का मूलमंत्र’ करार दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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