PM Modi Secretaries Meeting
PM Modi Secretaries Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपने आवास लोक कल्याण मार्ग पर भारत सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. इस बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के कार्यों तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई. बैठक का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत के लक्ष्य को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और प्रभावी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना था.
प्रधानमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकार के भीतर टीम भावना को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि मंत्रालयों और विभागों के बीच मौजूद क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर स्तर के अवरोधों को समाप्त किया जाए ताकि सभी विभाग साझा लक्ष्य के साथ मिलकर कार्य करें और योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचे.
बैठक में प्रधानमंत्री ने दोहराया कि शासन व्यवस्था का केंद्र हमेशा देश का आम नागरिक होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार की प्रत्येक नीति और निर्णय का उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना और उनकी अपेक्षाओं को पूरा करना होना चाहिए. उनके अनुसार, सुशासन का वास्तविक अर्थ तभी है जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे.
बुनियादी ढांचे पर किया जा रहा बड़ा निवेश
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश में बुनियादी ढांचे के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ स्वदेशी तकनीकों के विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करना बेहद जरूरी है.
ऊर्जा क्षेत्र पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा केवल आर्थिक विकास का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के कल्याण से भी सीधे जुड़ी हुई है. उन्होंने स्वदेशी नवाचार, ऊर्जा स्रोतों में विविधता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया.
सुधार सिर्फ नारा नहीं आवश्यकता है
प्रशासनिक सुधारों के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार केवल एक नारा या प्रचलित शब्द नहीं, बल्कि प्रभावी शासन की निरंतर आवश्यकता है. उन्होंने प्रक्रियाओं को सरल बनाने, कार्य संस्कृति में सकारात्मक बदलाव लाने और संस्थागत दक्षता को मजबूत करने की जरूरत बताई ताकि सरकारी कामकाज अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बन सके.
बैठक में साइबर सुरक्षा को भी एक महत्वपूर्ण विषय के रूप में उठाया गया. प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीकों का विस्तार जितनी तेजी से हो रहा है, उतनी ही सतर्कता साइबर खतरों के प्रति भी बरतनी होगी. उन्होंने डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया और कहा कि इस क्षेत्र में युवाओं, स्टार्टअप्स तथा नवाचार करने वाले उद्यमियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए. उनके अनुसार, साइबर सुरक्षा को एक व्यापक जनभागीदारी वाले अभियान का रूप दिया जाना चाहिए.
सही जानकारी पहुंचाना जरूरी
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जिन रणनीतिक क्षेत्रों में भारत बड़े स्तर पर काम कर रहा है, उनके बारे में लोगों तक सही और समयबद्ध जानकारी पहुंचाना आवश्यक है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी पहलों से जुड़ी गलतफहमियों और भ्रामक सूचनाओं का प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए सक्रिय संवाद की रणनीति अपनाई जाए.
शिक्षा और रोजगार के संबंध में प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम उद्योग जगत की भागीदारी से तैयार किए जाएं ताकि युवाओं को भविष्य की उभरती हुई औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्राप्त हो सके. उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया की चुनौतियों के अनुरूप सरकार को भी हमेशा युवा सोच, गतिशीलता और नवाचार की भावना के साथ कार्य करना चाहिए.
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बैठक के दौरान विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने विभागों की प्रगति, भविष्य की प्राथमिकताओं और क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी. बैठक में कैबिनेट सचिव, प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों तथा प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया. प्रधानमंत्री ने सभी विभागों से समन्वित प्रयासों के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य को निर्धारित समय में हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया.
-भारत एक्सप्रेस
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