PM Modi Sanskrit Subhashit on laughter: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को प्राचीन भारतीय ज्ञान पर आधारित एक प्रेरणादायक संदेश देशवासियों के साथ साझा किया. उन्होंने हंसी को सबसे अच्छी दवा बताते हुए एक संस्कृत सुभाषित पोस्ट शेयर किया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि”औषधेष्वपि सर्वेषु हास्यं श्रेष्ठं वदन्ति ह। स्वाधीनं सुलभं चैवारोग्यानन्दविवर्धनम्.”
औषधेष्वपि सर्वेषु हास्यं श्रेष्ठं वदन्ति ह।
स्वाधीनं सुलभं चैवारोग्यानन्दविवर्धनम्।। pic.twitter.com/9ZWmSi8Dfm
— Narendra Modi (@narendramodi) February 4, 2026
इस सुभाषित का अर्थ है, ‘कहा गया है कि सभी औषधियों में निश्चय ही हंसना श्रेष्ठ औषधि है, क्योंकि यह आसानी से बिना मूल्य के उपलब्ध हो जाती है और स्वास्थ्य तथा आनंद की वृद्धि करती है. अतः मुस्कुराते रहें’. बताते चलें कि मोदी द्वारा पोस्ट किये गए 53 सेकंड के वीडियो में इस सुभाषित का हिंदी और अंग्रेजी में अर्थ बताया गया है.
हंसी को बताया स्वास्थ्य की सबसे बड़ी दवा
प्रधानमंत्री ने इस पोस्ट के माध्यम से संदेश दिया कि हंसी एक ऐसी दवा है जो न केवल मुफ्त है बल्कि स्वास्थ्य और खुशी दोनों को बढ़ाती है. उन्होंने लोगों से मुस्कुराते रहने की अपील की. बता दें कि यह संदेश आज के तनावपूर्ण जीवन में बहुत प्रासंगिक है. पीएम मोदी अक्सर प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक संदर्भ से जोड़कर लोगों तक पहुंचाते हैं.
दिसंबर 2025 से शुरू की संस्कृत सुभाषित शेयरिंग
दिसंबर 2025 से प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से संस्कृत सुभाषित शेयर कर रहे हैं. वे अपने भाषणों, ‘मन की बात’ और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्राचीन श्लोकों का उपयोग करते हैं. इसका मकसद भारत की सभ्यतागत ज्ञान को समकालीन शासन और जन-संवाद से जोड़ना है. विकास, स्थिरता, लैंगिक न्याय, नैतिक नेतृत्व और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व जैसी आधुनिक प्राथमिकताओं को समझाने के लिए वे इन श्लोकों का सहारा लेते हैं.
दूरदर्शन के सुप्रभातम में रोजाना सुभाषित
पीएम मोदी ने 8 दिसंबर को एक कार्यक्रम में संस्कृत की प्रासंगिकता पर जोर दिया था. उन्होंने दूरदर्शन के ‘सुप्रभातम’ कार्यक्रम का जिक्र किया जिसमें प्रतिदिन एक संस्कृत सुभाषित प्रस्तुत किया जाता है. उन्होंने कहा, “दूरदर्शनस्य सुप्रभातम् कार्यक्रमे प्रतिदिनं संस्कृतस्य एकं सुभाषितम् अपि भवति. एतस्मिन् संस्कारतः संस्कृतिपर्यन्तम् अन्यान्य-विषयाणां समावेशः क्रियते.”
इस कार्यक्रम में संस्कार से लेकर संस्कृति तक के विषयों को शामिल किया जाता है. प्रधानमंत्री का यह प्रयास प्राचीन भारतीय ज्ञान को नई पीढ़ी से जोड़ने और जीवन में सकारात्मकता लाने का है. हंसी को सबसे अच्छी दवा बताकर उन्होंने एक बार फिर संदेश दिया कि छोटी-छोटी खुशियां ही बड़े बदलाव लाती हैं.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



