आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर सुकून और सच्ची खुशी की तलाश में रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि असली खुशी कहां छिपी है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद खास और प्रेरणादायक ‘सुभाषितम’ साझा कर इसी सवाल का जवाब दिया है. पीएम ने बताया कि जब हम निस्वार्थ भाव से किसी की मदद करते हैं, तो वह न केवल समाज को बेहतर बनाता है बल्कि हमें वह आत्मिक संतोष देता है जो दुनिया की किसी और चीज में नहीं.
क्या है ‘सुभाषित’ सबका दिल जीत लिया?
प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक बहुत ही गहरा श्लोक साझा किया है.
अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा ।
अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते ।।
निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। इससे आत्मिक खुशी तो मिलती ही है, समाज का भी कल्याण होता है।
अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।
अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥ pic.twitter.com/5C9w0KNQwH
— Narendra Modi (@narendramodi) May 6, 2026
इसका सीधा और सरल मतलब ये है कि अगर आप अपने मन, अपनी बातों और अपने काम से किसी भी जीव के प्रति नफरत या द्वेष नहीं रखते, दूसरों पर दया करते हैं और जरूरत पड़ने पर दान देते हैं- तो यही सबसे श्रेष्ठ आचरण है. पीएम मोदी ने इस संदेश के साथ लिखा कि निस्वार्थ भाव से किया गया काम ही सच्ची मानवता है. इससे व्यक्ति को खुद भी खुशी मिलती है और समाज का भी भला होता है.
वीडियो में दिखा भारत की संस्कृति का अक्स
इस वीडियो की पृष्ठभूमि में प्राचीन भारतीय मंदिरों की झलक, शांत जलाशय और दिव्य प्रकाश के बीच इस सुभाषित को दिखाया गया है. ये वीडियो हमें उन भारतीय मूल्यों की याद दिलाता है जिनमें सेवा, करुणा, दान और अहिंसा को सबसे ऊपर रखा गया है.
क्यों खास है ये संदेश?
यह धार्मिक या सांस्कृतिक श्लोक प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को भी दिखाता है जिसे वे अक्सर अपनी नीतियों में ‘सेवा परमो धर्म:’ के रूप में शामिल करते हैं. चाहे वह राष्ट्र-निर्माण की बात हो या सरकार के अलग-अलग सेवा कार्यक्रम, उनके पीछे कहीं न कहीं यही सोच काम करती है कि निस्वार्थ सेवा ही समाज को मजबूत बनाती है.
ये भी पढ़ें: आखिर कौन कर रहा है पंजाब को दहलाने की कोशिश? पंजाब में तीन घंटे में दो धमाके, दहशत का माहौल
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





