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बाबू जगजीवन राम जयंती: पीएम मोदी ने ‘बाबूजी’ के सामाजिक न्याय और देशप्रेम को किया नमन, बताया क्यों आज भी है प्रेरणादायी

बाबू जगजीवन राम जयंती 2026: पीएम मोदी ने पूर्व उप प्रधानमंत्री को दी श्रद्धांजलि. जानिए 1971 के युद्ध और हरित क्रांति में बाबूजी की वो भूमिका, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता.

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भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने न केवल सत्ता के शिखर को छुआ, बल्कि दबे-कुचले समाज की आवाज बनकर न्याय की एक नई परिभाषा लिखी. ऐसे ही एक महान जननायक थे देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम, जिन्हें दुनिया प्यार से ‘बाबूजी’ बुलाती है.

आज उनकी जयंती के अवसर पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबूजी के संघर्षों और राष्ट्र निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है.

सदैव रहेंगे स्मरणीय: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर बाबूजी को नमन करते हुए लिखा, “पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन.

पीएम मोदी ने आगे लिखा कि उन्होंने समानता और सामाजिक न्याय के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. देश के लिए उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा.”

सामाजिक न्याय के ‘मसीहा’ और कुशल प्रशासक

बाबू जगजीवन राम का जीवन संघर्ष और सफलता की एक ऐसी दास्तां है, जो आज के युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं. बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के उप प्रधानमंत्री पद तक का सफर उन्होंने अपनी काबिलियत और सिद्धांतों के दम पर तय किया. पीएम मोदी ने अपने संदेश में ‘समानता’ और ‘सामाजिक न्याय’ का जिक्र किया है, और वाकई बाबूजी ने ताउम्र छुआछूत और भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ मोर्चा संभाले रखा.

लेकिन बाबूजी सिर्फ एक दलित नेता नहीं थे, वे आजाद भारत के सबसे ताकतवर और सफल मंत्रियों में से एक थे. उनके पास रक्षा, कृषि और श्रम जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय रहे और हर जगह उन्होंने अपनी छाप छोड़ी.

1971 की जीत और ‘हरित क्रांति’ के नायक

जब हम बाबू जगजीवन राम को याद करते हैं, तो दो बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं जेहन में आती हैं. पहली,1971 का भारत-पाक युद्ध जिस समय वे देश के रक्षा मंत्री थे. उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने वो पराक्रम दिखाया जिसने दुनिया का भूगोल बदल दिया और बांग्लादेश का जन्म हुआ.

दूसरी बड़ी उपलब्धि रही ‘हरित क्रांति’. जब देश अनाज की भारी किल्लत से जूझ रहा था, तब कृषि मंत्री के रूप में बाबूजी ने आधुनिक खेती और नई तकनीकों को बढ़ावा दिया, जिससे भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन सका.

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-भारत एक्सप्रेस



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