प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी रविवार को लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर उन्हें याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर अहिल्याबाई जी के जीवन को सुशासन, अटूट देशभक्ति और जनकल्याण का एक बेजोड़ उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि बुद्धिमत्ता और करुणा की प्रतिमूर्ति लोकमाता ने देश की सांस्कृतिक चेतना को जगाने में जो योगदान दिया, उसे भारत कभी नहीं भूल सकता.
सांस्कृतिक जड़ों को सींचने का किया काम: PM Modi
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा, ‘लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन! पूरा देश उन्हें उनकी बुद्धिमत्ता, न्यायप्रियता और समाज कल्याण के लिए हमेशा आदर के साथ याद करता है.
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन! बुद्धिमत्ता, करुणा और जनकल्याण के प्रति अटूट निष्ठा को लेकर पूरा देश उन्हें आदर और सम्मान के साथ स्मरण करता है। उनका जीवन सुशासन, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने सदैव साहस और…
— Narendra Modi (@narendramodi) May 31, 2026
पीएम मोदी ने आगे लिखा कि उन्होंने देश भर के पवित्र मंदिरों और तीर्थस्थलों का जीर्णोद्धार कराकर हमारी सांस्कृतिक जड़ों को सींचने का अद्भुत काम किया. उनका त्याग और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण हर पीढ़ी को रास्ता दिखाता रहेगा.’
काशी विश्वनाथ मंदिर से महेश्वर की साड़ियों तक
1725 में जन्मीं अहिल्याबाई होल्कर सिर्फ मालवा साम्राज्य की रानी नहीं थीं, बल्कि वे भारतीय इतिहास में महिला नेतृत्व और कुशल प्रशासन की सबसे बड़ी मिसाल हैं. 1767 से 1795 के अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे ऐतिहासिक काम किए, जिनकी गूंज आज भी सुनाई देती है. औरंगजेब द्वारा तोड़े जाने के बाद वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण अहिल्याबाई होल्कर ने ही कराया था. इसके अलावा उन्होंने देश के कोने-कोने में घाट, कुएं, धर्मशालाएं और सड़कें बनवाईं.
उन्होंने महेश्वर (मध्य प्रदेश) को अपनी राजधानी बनाया और वहां के कपड़ा उद्योग को बढ़ावा दिया, जिसे आज हम विश्व प्रसिद्ध ‘महेश्वरी साड़ियों’ के नाम से जानते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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