बिहार के सिलाव प्रखंड के सरीचक गांव की मंजुला कुमारी आज महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं. कभी वह छोटे स्तर पर हल्दी पीसकर लोकल बाजार में बेचती थीं, लेकिन आज उन्होंने ‘सरीचक एंटरप्राइजेज’ के नाम से एक सफल मसाला उद्योग खड़ा कर लिया है.
योजना से मिला सहारा
मंजुला को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) की जानकारी जीविका समूह के माध्यम से मिली. उन्होंने इस योजना के तहत आवेदन किया और बड़गांव स्थित केनरा बैंक से 7.21 लाख रुपये का लोन लिया. अपनी बचत जोड़कर उन्होंने करीब 10 लाख रुपये की लागत से मसाला यूनिट शुरू की.
गुणवत्ता पर खास ध्यान
मंजुला का कहना है कि उनके मसालों की सबसे बड़ी खासियत शुद्धता है. उन्होंने हल्दी, मिर्च, धनिया और अन्य मसालों के लिए अलग-अलग मशीनें लगाई हैं, ताकि स्वाद और गुणवत्ता बनी रहे. उनके यहां खड़ा और पिसा हुआ, दोनों तरह का मसाला तैयार किया जाता है.
रोजगार का जरिया बना कारोबार
शुरुआत में बिक्री में दिक्कत आई, लेकिन मंजुला ने हर गांव में जीविका से जुड़ी महिलाओं को जोड़कर डिमांड और सप्लाई का नेटवर्क तैयार किया. आज उनके साथ 30 से ज्यादा लोग जुड़े हैं. इसके अलावा घर पर पिसाई और पैकेजिंग के लिए भी स्टाफ रखा गया है.
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बढ़ता कारोबार और नई पहचान
अब उनके मसाले सिलाव के अलावा राजगीर के बड़े होटलों, स्कूलों और मॉल तक पहुंच रहे हैं. इस सफलता से खुश मंजुला नरेंद्र मोदी का आभार जताती हैं. उन्हें योजना के तहत करीब 2.5 लाख रुपये की सब्सिडी भी मिली. उनका सपना है कि वह एक दिन प्रधानमंत्री से मिलें.
-भारत एक्सप्रेस
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