यूपी सरकार की सख्ती के बावजूद मेरठ में पुलिस का भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है, ताजा मामला मेरठ के मवाना थानेदार विशाल श्रीवास्तव और सठला चौकी इंचार्ज सत्येंद्र कुमार का सामने आया है. आरोप है कि तस्करों को पकड़ने के नामपर दोनों पुलिसकर्मी पहले तो सठला गांव में अवैध हथियारों की तस्करी करने के नाम पर चेकिंग अभियान चलाते हैं फिर लोगों के घर में घुसकर मारपीट तोड़फोड़ के साथ अवैध वसूली का खेल शुरू करते हैं.
पुलिस की वसूली से परेशान लोगों ने की शिकायत
पुलिस की वसूली से परेशान कुछ लोगों ने डीआईजी कलानिधि नैथानी से सबूतों के साथ शिकायत की जिसके बाद डीआईजी ने एसएसपी को दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए. उसके बाद एसएसपी ने जांच कराई तो पीड़ित के आरोप सत्य पाए गए इसके बाद एसएसपी विपिन ताड़ा ने इंस्पेक्टर मवाना विशाल और चौकी इंचार्ज सत्येंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया है.
सीओ को सौंपी गई पूरे मामले की जांच
इतना ही नहीं इस पूरे मामले की जांच सीओ को सौंपी है. उनका साफ तौर पर यही कहना है कि अगर पैसे के लेनदेन की पुष्टि हुई तो थानेदार और दरोगा के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करके उन्हें जेल भी भेजा जाएगा. भ्रष्टाचार के आरोपियों को किसी भी हाल में बक्सा नहीं जाएगा
मेरठ पुलिस पर भ्रष्टाचार के आरोप का पहला मामला नहीं
हालांकि यह कोई पहला मामला नहीं है जब मेरठ पुलिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हो इससे पहले मवाना में ही एंटी करप्शन की टीम ने एक दरोगा को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था. सरधना और भावनपुर इलाके से भी दरोगा को एंटी करप्शन ने रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था. मेरठ में तैनात एक इंस्पेक्टर को प्रशासनिक अधिकारी पर अफसरों ने पूर्वांचल में तबादला भी कराया था.
अवैध वाहनों की कटान पुलिस के संरक्षण में होने के लगे थे आरोप
इसके अलावा कुछ दिन पहले लोहियानगर थाना इलाके में अवैध वाहनों की कटान पुलिस के संरक्षण में होने के आरोप लगे थे जिसके बाद डीआईजी ने एक्शन लिया और थानेदार को जिले से बाहर ट्रांसफर कर दिया.
-भारत एक्सप्रेस
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