Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

बांकीपुर के युवाओं को रोजगार दिलाएंगे प्रशांत किशोर? जानिए क्या है इस ऐलान का पूरा मतलब

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के युवाओं को रोजगार देने का बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है.

रिपोर्ट- आशुतोष कुमार


बांकीपुर से विधायक बनने के बाद जनसुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर ने अपने विधानसभा क्षेत्र के युवाओं को लेकर एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि क्षेत्र के हजारों युवाओं को रोजगार दिलाने की दिशा में काम किया जाएगा. पीके के इस ऐलान के बाद बिहार की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है. अब सवाल यह है कि आखिर युवाओं को नौकरी देने की योजना कैसे लागू होगी और इसके पीछे रोजगार का मॉडल क्या होगा?

प्रशांत किशोर कुछ दिनों तक सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए. इसके बाद जब वह सामने आए तो उन्होंने बांकीपुर के युवाओं को लेकर यह बड़ा ऐलान कर दिया. उनका कहना है कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है. जाहिर है, चुनाव के दौरान रोजगार और नौकरी का मुद्दा बिहार के मतदाताओं के बीच बेहद अहम रहा है और ऐसे में पीके की घोषणा ने लोगों का ध्यान खींचा है.

सियासी दलों ने उठाया सवाल

प्रशांत किशोर की घोषणा विपक्षी दलों के साथ सत्तापक्ष को भी रास नहीं आई. बिहार की राजनीति में रोजगार को लेकर पहले से ही आरोप-प्रत्यारोप चलता रहा है. ऐसे में पीके के इस बयान ने राजनीतिक दलों को उन्हें घेरने का एक नया मौका दे दिया है.

आरजेडी और जेडीयू दोनों की ओर से प्रशांत किशोर के दावे पर सवाल उठाया गया हैं. राजनीतिक नेताओं का तर्क है कि रोजगार देना सिर्फ घोषणा करने भर का मामला नहीं है. इसके लिए स्पष्ट योजना, संसाधन और लंबे समय तक चलने वाली व्यवस्था की जरूरत होती है.

दूसरी तरफ, पीके के आलोचकों का यह भी कहना है कि उनकी पृष्ठभूमि को देखते हुए उनके रोजगार मॉडल को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं. राजनीतिक विरोधियों ने आशंका जताई है कि कहीं युवाओं को रोजगार के नाम पर किसी तरह की ऐसी व्यवस्था में ना लगाया जाए, जिसमें उनके हितों की अनदेखी हो.

क्या आसान होगा हजारों युवाओं को रोजगार देना?

प्रशांत किशोर का ऐलान निश्चित तौर पर बड़ा और साहसिक है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना आसान नहीं है. हजारों युवाओं के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है. वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडे के मुताबिक, सबसे पहले यह साफ होना जरूरी है कि यहां नौकरी से मतलब सरकारी नौकरी है, निजी क्षेत्र में रोजगार है या फिर किसी तरह का स्वरोजगार मॉडल है क्योंकि इन तीनों की प्रकृति और व्यवस्था पूरी तरह अलग होती है.

बांकीपुर जैसे बड़े विधानसभा क्षेत्र में युवाओं की संख्या काफी है. ऐसे में अगर वास्तव में हजारों लोगों को रोजगार देने की योजना है तो उसके लिए ठोस रोडमैप सामने रखना होगा. सिर्फ संख्या बताने से काम नहीं चलेगा, बल्कि यह भी बताना होगा कि रोजगार कहां से आएगा, युवाओं का चयन कैसे होगा और उन्हें किस तरह की नौकरी या काम दिया जाएगा.

ये भी पढ़ें: रवि किशन की ‘जेन जी’ वाली लोकप्रियता! सांसद बोले- युवाओं के प्यार ने सच में हैरान कर दिया

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital