Bharat Express DD Free Dish

अतीक परिवार का सियासी comeback! किस सीट से चुनाव लड़ेगा अतीक का बेटा? 1989 का गढ़ फिर से जीतने की तैयारी

UP News: प्रयागराज में अतीक अहमद की मौत के बाद भी उनके परिवार की राजनीतिक मौजूदगी चर्चा में है. उमर और अली अहमद के चुनावी मैदान में उतरने की अटकलें तेज हो गई हैं.

UP News: प्रयागराज की राजनीति में अतीक अहमद की मौत के बाद माना जा रहा था कि उनके परिवार का दबदबा खत्म हो गया है. हालात बताते हैं कि समर्थकों की भीड़ और परिवार की मौजूदगी अब भी असरदार है.

5 बेटों में से 2 की मौत

अतीक के पांच बेटों में से असद की 2023 में एनकाउंटर में मौत हुई थी. हाल ही में सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की सड़क दुर्घटना में जान चली गई. अब परिवार में तीन बेटे उमर, अली और एक अन्य बचे हैं.

जेल से निकले उमर और अली

अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट से कस्टडी पैरोल पर उमर और अली को बाहर आने की इजाज़त मिली. दोनों भाइयों की गले मिलती तस्वीरें भावुक कर देने वाली थीं. यह मुलाकात जाते-जाते कई राजनीतिक अटकलें छोड़ गई.

जनाजे में उमड़ी भीड़

अबान के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. चर्चा है कि यह भीड़ सिर्फ विदाई देने नहीं बल्कि अतीक की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश देने भी आई थी. इसी वजह से उमर के चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हो गईं.

AIMIM से जुड़ाव की चर्चा

जनाजे के बाद उमर ने नमाज पढ़ाई और फिर AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली से मुलाकात की. इस दौरान ओवैसी के लिए सलाम और पैगाम भी भेजा गया. शौकत अली ने साफ किया कि परिवार AIMIM से जुड़ा है हालांकि चुनाव लड़ने पर कोई आधिकारिक बात नहीं हुई.

पार्टी नेताओं का रुख

AIMIM के महानगर अध्यक्ष अफसर महमूद ने कहा कि अगर परिवार से कोई चुनाव लड़ना चाहे तो पार्टी उसका स्वागत करेगी. उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में अतीक अहमद ने AIMIM का दामन थामा था और उनकी पत्नी शाइस्ता परवीन ने लखनऊ में सदस्यता ली थी. बाद में शाइस्ता ने पार्टी छोड़ी, लेकिन बाकी लोग अब भी जुड़े हैं.

कानूनी सेल का बयान

AIMIM लीगल सेल के अध्यक्ष ओसामा नदवी ने भी कहा कि अगर परिवार चुनावी मैदान में उतरना चाहे तो पार्टी पूरा समर्थन देगी. इससे यह साफ होता है कि AIMIM अतीक परिवार को लेकर खुला रुख रखती है.

पल्लवी पटेल की मुलाकात

सपा विधायक और अपना दल (कैमरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने भी प्रयागराज जाकर परिवार से मुलाकात की. इस मुलाकात ने सियासी समीकरणों को और हवा दी. अतीक के पुराने रिश्ते डॉ. सोनेलाल पटेल से रहे हैं. इसलिए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अपना दल भी परिवार को मौका दे सकता है.

अन्य नेताओं का समर्थन

जनाजे के दौरान मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी भी उमर और अली से मिले. इससे साफ है कि कई दल और नेता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परिवार के साथ खड़े हैं.

इलाहाबाद पश्चिम सीट पर नजर

सबसे ज्यादा चर्चा इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट को लेकर है. समर्थकों की इच्छा है कि उमर या अली 2027 में इसी सीट से चुनाव लड़ें. यह सीट अतीक परिवार का पारंपरिक गढ़ रही है.

अतीक की राजनीतिक शुरुआत

1989 में अतीक अहमद ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में इसी सीट से जीत दर्ज की थी. इसके बाद 1991 और 1993 में भी जीत हासिल की. बाद में सपा से जुड़कर 1996 में फिर जीत दर्ज की. 2002 में अपना दल के टिकट पर पांचवीं बार विधायक बने.

सांसद बनने के बाद झटका

2004 में फूलपुर से सपा के टिकट पर सांसद बने और इलाहाबाद पश्चिम सीट छोड़ दी. उपचुनाव में उनके भाई अशरफ को बीएसपी के राजू पाल ने हराया. यह अतीक के लिए बड़ा झटका था. बाद में राजू पाल की हत्या हुई और अशरफ ने उपचुनाव जीता.

लगातार हार का सिलसिला

2005 के बाद से परिवार इस सीट पर जीत हासिल नहीं कर सका लेकिन अब 2027 में उमर अहमद के इसी सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा है. समर्थकों का मानना है कि यह सीट उनके लिए मुफीद साबित हो सकती है.

योगी सरकार का सख्त रुख

हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख को देखते हुए परिवार फिलहाल खुलकर चुनावी ऐलान करने से बच रहा है. यही वजह है कि किसी भी दल या परिवार की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है.

ये भी पढ़ें-‘CJP के बाद अब ‘दिमागी नक्सल जनता पार्टी’…!’ पीएम के बयान को बनाया हथियार, फॉलोअर्स का आंकड़ा लाख के पार

राजनीतिक समीकरणों की गर्माहट

फिर भी प्रयागराज के गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि अतीक की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उमर अहमद चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. AIMIM और अपना दल जैसे दलों का समर्थन मिलने की संभावना भी जताई जा रही है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read