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प्रयागराज में लगाने वाले कुंभ 2025 की तैयारी अंतिम चरण में, 11 प्रस्ताव पास, 700 साल बाद संत करेंगे राजसी स्नान

प्रयागराज में कुंभ 2025 को लेकर की जा रही तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं. सभी अखाड़े अपनी-अपनी तैयारियों को जल्द से जल्द पूरा करने में लगे हुए हैं. उनकी इन्हीं तैयारियों में कुछ नामों को बदलने की है.

Prayagraj Kumbh

प्रयागराज में कुंभ 2025 को लेकर की जा रही तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं. सभी अखाड़े अपनी-अपनी तैयारियों को जल्द से जल्द पूरा करने में लगे हुए हैं. उनकी इन्हीं तैयारियों में कुछ नामों को बदलने की है. इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वो आने वाले कुंभ में ‘शाही स्नान’, पेशवाई और चेहरा-मोहरा शब्द का प्रयोग नहीं करेंगे. इन नामों को बदलने के पीछे यह तर्क दिया गया है कि ये सभी शब्द उर्दू के हैं, जो मुगलों ने दिए थे और ये गुलामी का प्रतीक है. सदियों से चली आ रही शाही स्नान का नाम बदलने के बाद अब करीब 700 साल बाद कुंभ 2025 में संत राजसी स्नान करेंगे.

अंतिम चरण में कुंभ की तैयारी

संतों ने कुंभ में उर्दू और फारसी शब्दों का प्रयोग नहीं करने का निर्णय लिया है. इनके जगह पर संस्कृतनिष्ठ हिंदी के शब्द ‘राजसी स्नान’ और छावनी प्रवेश रखा गया है. परिषद ने बैठक के बाद प्रस्ताव को शासन को भी भेजा है. उज्जैन में 26 जुलाई को हुई अखाड़ों की बैठक में पहली बार इन शब्दों को हटाने की कवायद शुरू हुई. महेंद्र गिरी ने इन शब्दों को हटाने का प्रस्ताव दिया था. इसके बाद 6 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रयागराज पहुंचे, जहां उन्होंने कुंभ की तैयारियों की समीक्षा बैठक की और संतों से मुलाकात की. उस दौरान भी इन शब्दों को हटाने को लेकर चर्चा हुई.

अखाड़ा परिषद् ने पास किए 11 प्रस्ताव

महाकुंभ से शाही और पेशवाई शब्द को हटा दिया गया है. अब शाही स्नान के जगह पर राजसी स्नान होगा. महाकुंभ में स्नान के लिए आने वाले आगंतुकों के पास आधार कार्ड होना अनिवार्य है. महाकुंभ में आने वाले संतों को आईडी कार्ड दिए जाएंगे. गाय को राष्ट्र गौ माता का दर्जा दिया जाए. लव जेहाद और गौ हत्या पर कड़े कानून बनाए जाएं. अखाड़ों को एक समान बजट मिले. बड़े-बड़े अखाड़ों को 5-5 करोड़ रुपये मिले. महाकुंभ मेले में ढोंगी बाबाओं का प्रवेश पूर्ण रूप से वर्जित किया जाए. गैर सनातनी अधिकारियों को महाकुंभ मेला की ड्यूटी में न लगाया जाए. अखाड़ों के संतों से अधिकारी मुलाकात नहीं करते हैं, इस पर भी विचार किया जाए.

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-भारत एक्सप्रेस

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