Bharat Express DD Free Dish

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की सराहना, भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूमिका पर प्रकाश डाला

राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ योजना की सराहना की और भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था को वैश्विक आर्थिक प्रवृत्तियों पर असर डालने वाला बताया. उन्होंने संविधान का महत्व भी समझाया.

President-Draupadi-Murmu

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के प्रस्ताव को सराहा और यह बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था आज वैश्विक आर्थिक प्रवृत्तियों को प्रभावित कर रही है. राष्ट्रपति मुर्मू ने 76वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे संविधान का 75 वर्षों का सफर एक युवा गणराज्य की सर्वांगीण प्रगति का प्रतीक है.

राष्ट्रपति मुर्मू ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और सीमाओं की रक्षा कर रहे सैनिकों, पुलिस और अर्धसैनिक बलों को सम्मानित किया. साथ ही न्यायपालिका, प्रशासन और विदेशों में हमारे मिशनों के कर्मचारियों को भी बधाई दी. उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ योजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह योजना सरकार के कार्यों में स्थिरता बनाए रखने, नीति निष्क्रियता को रोकने, संसाधनों का सही तरीके से उपयोग और वित्तीय बोझ को कम करने में मदद कर सकती है.

भारत की आर्थ‍िक प्रगति और वैश्विक प्रभाव

राष्ट्रपति ने बताया कि भारत की अर्थव्यवस्था आज वैश्विक प्रवृत्तियों को प्रभावित कर रही है और यह भारत के सामूहिक आत्मविश्वास का परिणाम है. 75 साल पहले जब देश स्वतंत्र हुआ, तब बड़े हिस्से में गरीबी और भुखमरी थी, लेकिन भारतीयों का आत्मविश्वास कभी कमजोर नहीं हुआ. आज, भारत एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बन चुका है, और इसकी कृषि, निर्माण और बुनियादी ढांचे में श्रमिकों का कठिन परिश्रम दिख रहा है. उन्होंने कहा कि भारत के उच्च आर्थिक विकास दर ने युवा वर्ग के लिए रोजगार अवसर उत्पन्न किए हैं और किसानों तथा श्रमिकों के हाथों में अधिक धन आया है.

वित्तीय समावेशन, सामाजिक कल्याण योजनाएं

राष्ट्रपति ने सरकार द्वारा किए गए वित्तीय समावेशन के प्रयासों की सराहना की, जिसमें प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया और अटल पेंशन योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने कल्याण के नए मानकों को स्थापित किया है, जैसे कि आवास और पीने के पानी की व्यवस्था को एक अधिकार के रूप में प्रदान करना. इसके अलावा, विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए सहायता प्रदान की जा रही है.

डिजिटल भुगतान प्रणाली और बैंकों की स्थिति

राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत के डिजिटल भुगतान प्रणाली की सराहना की, जो अब दुनिया में सबसे बेहतरीन डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचों में से एक बन चुका है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बैंकों की स्थिति को मजबूत करने के लिए किए गए उपायों जैसे Insolvency and Bankruptcy Code ने सार्वजनिक बैंकों के गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) को कम करने में मदद की है.

संस्कृति और धरोहर का संरक्षण

भारत अपनी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है. राष्ट्रपति ने आगामी पुरातात्विक अनुभव संग्रहालय के बारे में बात की, जो गुजरात के वडनगर में स्थापित हो रहा है. यह संग्रहालय 800 ईसा पूर्व से मानव बस्तियों के प्रमाणों को प्रदर्शित करेगा. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने 11 भाषाओं को शास्त्रीय भाषाओं के रूप में मान्यता दी है और इन भाषाओं में शोध को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं.

शिक्षा, विज्ञान और अनुसंधान में प्रगति

राष्ट्रपति ने भारत के शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख किया और कहा कि पिछले दशक में शिक्षा की गुणवत्ता और भौतिक बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है. उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा किए गए शानदार कार्यों की भी सराहना की, जिसमें हाल ही में सफल अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग और भारत का चौथा देश बनना शामिल है, जो इस तकनीक को पूरा कर चुका है.

खेल और वैश्विक पहचान

राष्ट्रपति ने भारत के खिलाड़ियों की उपलब्धियों की भी सराहना की, जिसमें विश्व चेस चैम्पियन बनने वाले युवा खिलाड़ी डी. गुकशे की उपलब्धि शामिल थी. उन्होंने विदेशों में रहने वाले भारतीयों और भारतीय उत्पत्ति के लोगों की सफलता का भी उल्लेख किया और कहा कि वे देश की संस्कृति और सभ्यता को पूरी दुनिया में फैलाने का काम कर रहे हैं.

युवाओं और महिलाओं का योगदान

राष्ट्रपति ने भारत के युवा वर्ग, विशेष रूप से महिलाओं के योगदान की सराहना की और कहा कि उनकी मेहनत से भारत का भविष्य आकार लेगा. उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं ने शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभाई है, जहां पिछले दशक में 60 प्रतिशत से अधिक शिक्षक महिलाएं बनी हैं.

भारत का जलवायु परिवर्तन पर दृष्टिकोण

राष्ट्रपति मुर्मू ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया और इसके लिए ‘मिशन लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ और ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों का उल्लेख किया. उन्होंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों, सत्य और अहिंसा, पर भी बात की और कहा कि यह सिद्धांत आज भी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं.

भारत का भविष्य और विकास

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत का भविष्य युवा पीढ़ी पर निर्भर है, और सरकार का प्रयास है कि इस पीढ़ी को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान की जाए. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष पर एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरेगा.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read