पंजाब यूनिवर्सिटी 2026 के छात्रसंघ चुनाव में ABVP ने लगातार दूसरी बार जीता अध्यक्ष पद
Punjab University Election results: पंजाब की राजनीति की ‘नर्सरी’ कहे जाने वाले प्रतिष्ठित पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट काउंसिल (PUCSC) चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे क्षेत्र के राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है. दरसल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के उम्मीदवार अंकित बिढान ने आम आदमी पार्टी (AAP) समर्थित ‘ASAP’ के प्रत्याशी आदिल बराड़ को 512 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद की प्रतिष्ठित कुर्सी पर परचम फहराया है.
ज्ञात रहे पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब ABVP ने लगातार दो बार प्रेसिडेंट पद जीता है. राज्य में सत्तासीन ‘आप’ सरकार और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस-दोनों के लिए यह नतीजा किसी बड़े राजनीतिक झटके से कम नहीं है, क्योंकि यह जनादेश ऐसे समय में आया है जब राज्य में विधानसभा चुनावों की उल्टी गिनती शुरू होने वाली है.
ढह गया ‘आप’ की ASAP का किला?(Punjab University Election results)
साल 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन ASAP के लिए यह हार बेहद आत्ममंथन वाली है. सत्ता की पूरी ताकत और संसाधनों को झोंकने के बावजूद ASAP के आदिल बराड़ 2,637 वोटों पर सिमट गए, जबकि ABVP के अंकित बिढान 3,149 वोट हासिल कर विजयी रहे. वहीं, कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI का सूपड़ा साफ होना यह दर्शाता है कि कैंपस में Gen-Z और युवा पीढ़ी परंपरागत या ‘फ्रीबीज’ की राजनीति को नकार रही है.
महासचिव पद पर 4,045 रिकॉर्ड वोट पाकर जीतने वाले निर्दलीय उम्मीदवार ध्यान सिंह (समीर) का यह कहना कि “छात्र अब सिर्फ मुफ़्त चॉकलेट से खुश होने वाले नहीं हैं”, सत्ताधारी और विपक्षी दलों के खोखले वादों पर सीधा करारा तमाचा है.
‘लोकल बनाम बाहरी’ का कार्ड हुआ फेल
इस चुनाव (Punjab University Election results) की सबसे अभूतपूर्व बात यह रही कि चारों मुख्य कार्यकारी पदों पर जीतने वाले छात्र मूल रूप से पंजाब के रहने वाले नहीं हैं. अध्यक्ष अंकित बिढान (जींद, हरियाणा), महासचिव ध्यान सिंह (फतेहाबाद, हरियाणा) और सह-सचिव विशाल बामल (हिसार, हरियाणा) जहां पड़ोसी राज्य हरियाणा से आते हैं, वहीं उपाध्यक्ष अरमान सिंह भिंडर (नालागढ़) हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं.
पंजाब यूनिवर्सिटी में लंबे समय से चली आ रही ‘क्षेत्रीय अस्मिता और स्थानीय कार्ड’ की राजनीति को दरकिनार कर छात्रों ने योग्यता, कार्यशैली और व्यक्तिगत संवाद को तरजीह दी है. राष्ट्रीय मुद्दों और सुदृढ़ संगठन संरचना के बल पर ABVP ने पंजाब के युवाओं के बीच अपनी पैठ गहरी कर ली है.
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी ने शेयर की नई रील, भारत की GDP ग्रोथ पर जताई खुशी; राहुल गांधी पर भी जमकर साधा निशाना
2027 के चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
पंजाब यूनिवर्सिटी का यह जनादेश केवल कैंपस तक सीमित नहीं है बल्कि यह पंजाब की भावी राजनीति का रुझान तय करता है. जब राज्य में महज कुछ महीनों के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं, तब सूबे की राजधानी चंडीगढ़ स्थित सबसे बड़े शिक्षण संस्थान में युवाओं का भगवंत मान सरकार से दूर छिटकना आम आदमी पार्टी के ‘यूथ कनेक्ट’ पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
यदि AAP और कांग्रेस समय रहते अपने छात्र एवं युवा संगठनों की जड़ों में आए इस बिखराव को दूर नहीं कर पाती हैं, तो मुख्यधारा की चुनावी राजनीति में भी उन्हें युवाओं के इस असंतोष का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

