दिल्ली और दिल्ली के आसपास के इलाकों में हवा हर दिन जहरीली होती जा रही है. वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में दिल्ली ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इस प्रदूषण के लिए दिल्ली के पड़ोसी राज्य पंजाब को जिम्मेदार माना जाता है, क्योंकि साल दर साल यहां पराली जलाने की घटनाएं बढ़ती रही हैं. लेकिन इस बीच एक खबर लोगों को चौका दिया है. पंजाब में एक गांव जो पिछले 6 साल से पराली जलाने की प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म कर चुका है.
6 साल से पराली नहीं जलाई
पंजाब के मोगा जिले में ‘रणसिंह कलां गांव’ के निवासियों ने पिछले 6 साल से पराली नहीं जलाई है. पराली जलाने के बजाय वे इसे खेतों में ही नष्ट कर रहे हैं. उन्होंने इसे प्रदूषण रोकने के लिए एक बड़ा कदम बताया है. इसी वजह से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस गांव का दौरा कर लोगों की सराहना की है.
पंजाब से पराली प्रबंधन का संदेश
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “मैं आज पंजाब को बधाई देने आया हूं. पंजाब के पराली प्रबंधन के प्रयोग को सारे देश में ले जाने आया हूं. पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में इस साल 83 प्रतिशत की कमी आई है. जहां लगभग 83 हजार पराली जलाने की घटनाएं होती थी वह अब घटकर 5 हजार के करीब हो चुकी हैं.”
उन्होंने अपने X हैंडल पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा “पंजाब के रणसिंह कलां गांव के किसान भाइयों ने कई वर्षों से पराली नहीं जलाई है. इस निर्णय से उन्हें पानी, खाद और डीजल की बचत, मिट्टी की उर्वरता में बढ़ोतरी और बेहतर उत्पादन सहित कई लाभ मिल रहे हैं”
पंजाब से पराली प्रबंधन का संदेश…
पंजाब के रणसिंह कलां गाँव के किसान भाइयों ने कई वर्षों से पराली नहीं जलाई है। इस निर्णय से उन्हें पानी, खाद और डीज़ल की बचत, मिट्टी की उर्वरता में बढ़ोतरी और बेहतर उत्पादन सहित कई लाभ मिल रहे हैं।
आज रणसिंह कलां पूरा देश को यह संदेश दे रहा है… pic.twitter.com/Q6KhdOf76R
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) November 27, 2025
कैसे नष्ट हो रही पराली
रणसिंह कलां गांव के किसान पराली जलाने के बजाय सुपर सीडर जैसी मशीनों की मदद से इसे मिट्टी में मिला रहे हैं. गांव में किसनों की एक सोसायटी भी बनाई गई है, जिसके माध्य से पराली को खेतों में मिलाने के लिए जरूरी उपकरण खरीदे गए हैं.
इस पहल के बाद आसपास के कई गांव भी इस मॉडल को अपना रहे हैं. यही वजह है कि खुद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद इस प्रणाली को देखने पहुंचे और किसानों से पूरी प्रक्रिया समझी. यहां किसानों को पराली नहीं जलाने पर मुआवजा भी मिलता है और लकी ड्रा भी आयोजित कराया जाता है.
ये भी पढ़ें: ‘शिवकुमार हमें स्वीकार’, कर्नाटक के ‘किंग’ पर मुहर! सिद्धारमैया गुट ने डाले हथियार, 1 दिसंबर को फैसला !
पंजाब में पराली जलाने के मामले 5100 के पार
पंजाब में बुधवार को पराली जलाने के मामले की संख्या 5100 के पार पहुंच गई. छह नए केसों के साथ कुल संख्या बढ़कर 5101 हो गई है. इसी बीच मंडी गोबिंदगढ़ का एक्यूआई खराब श्रेणी में दर्ज हुआ, जो 221 रहा. इसके अलावा पांच शहरों का एक्यूआई यलो जोन में दर्ज किया गया. इनमें अमृतसर का एक्यूआई 182, जालंधर का 150, खन्ना का 139, पटियाला का 126 और लुधियाना का 128 दर्ज किया गया.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


