बालोतरा/नतांश पटेल: अक्सर लोग अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी को बैंक की तिजोरी में सुरक्षित रखते हैं, लेकिन राजस्थान के बालोतरा (Balotra) जिले के नेवाई गांव में एक किसान का देसी ‘तिजोरी’ वाला आइडिया उसी पर भारी पड़ गया. एक छोटी सी भूल और लापरवाही के चलते किसान मांगीलाल के पूरे 5 लाख रुपये दीमक की भेंट चढ़ गए. जिसने भी यह वाकया सुना, वह बस अपना सिर पकड़ कर रह गया.
खर्च होने के डर से खेत में गाड़े थे पैसे
जानकारी के मुताबिक, किसान मांगीलाल ने हाल ही में अपना एक प्लॉट बेचा था, जिससे उसे 5 लाख रुपये मिले थे. नशे की लत और भूलने की बीमारी के शिकार मांगीलाल को डर था कि कहीं वह ये पैसे फालतू खर्च न कर दे. इसी डर से उसने पूरी रकम एक पॉलीथिन में पैक की और उसे अपने ही खेत में एक गड्ढा खोदकर गाड़ दिया.
कुछ समय बाद जब उसे पक्का कमरा बनवाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ी, तो वह भूल चुका था कि उसने पैसे खेत में आखिर किस जगह दबाए थे. उसने कई जगह खुदाई भी की, लेकिन पैसे नहीं मिले.
बारिश ने खोली ‘किस्मत की गांठ’
पैसे न मिलने से निराश परिवार जब बारिश के बाद खेत में बुवाई की तैयारी कर रहा था, तभी एक रात जमीन से रुपयों से भरी वह पॉलीथिन बाहर निकल आई. सुबह जब पत्नी और बेटे ने वह थैली खोली, तो उनके होश उड़ गए. मिट्टी के अंदर लंबे समय तक दबे रहने के कारण अंदर रखे ₹500 के सभी नोटों को दीमक पूरी तरह से चट कर चुकी थी. नोट बुरी तरह कट-फट और गल चुके थे.
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बैंक का इनकार, टूटा पक्के मकान का सपना
पांच लाख रुपये की रकम बर्बाद होने के बाद बेबस परिवार ने खराब नोटों को बैंक में बदलवाने की कोशिश की, लेकिन नोटों की हालत इतनी खराब थी कि बैंक ने भी उन्हें बदलने से साफ इनकार कर दिया. प्लॉट बेचकर पक्का मकान बनाने का जो सपना मांगीलाल ने देखा था, वह अब 5 लाख रुपयों के साथ उसी खेत की मिट्टी में दफन होकर रह गया है.
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