Ram Mandir Trust Meeting
Ram Mandir Trust Meeting: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर आज 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक हुई. बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा को लेकर ट्रस्ट के सदस्यों में जबरदस्त नाराजगी देखी गई. बैठक में दोनों से इस्तीफा ले लिया गया.
राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक राम मंदिर परिसर में संपन्न हुई. करीब 3 घंटे तक चली इस बैठक में चढ़ावा चोरी सहित कई गंभीर मामलों पर चर्चा हुई. बैठक खत्म होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें उन्होंने बताया कि महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है. अब ट्रस्ट की कमान कृष्ण मोहन को सौंप दी गई है. अब चंपत राय की जगह पर कृष्ण मोहन ही संभालेंगे.
पाप से जुड़े लोगों को मिलेगी सजा
बता दें कि, बैठक से पहले राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास ने चढ़ावा चोरों पर बड़ा हमला किया. उन्होंने कहा कि जो भी पाप से जुड़ा हुआ है उसे सजा दिलाएंगे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा पर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने जबरदस्त नाराजगी दिखाई.
ये लोग रहे शामिल
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की इस बैठक में 9 सदस्य व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए. 14 सदस्यों वाले इस ट्रस्ट में कुछ सदस्य ऑनलाइन भी जुड़े. ट्रस्ट के महंत नृत्यगोपाल दास, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी, ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन सहित कई लोग मौजूद रहे. वहीं चंपत राय और अनिल मिश्रा इस बैठक से दूर रहे.
ये पावर की लड़ाई है
उधर राम मंदिर ट्रस्ट की इस बैठक को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है. जहां सीएम योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्री राम को भारत की आत्मा बताया. वहीं अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर सनातन के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया.
अखिलेश यादव ने कहा कि चढ़ावा, चंदा और राम मंदिर पर पलने वाले चोरों का यह गैंग जनता के गुस्से का सामना नहीं कर पा रहा है. जनता के गुस्से से चढ़ावा चोर गैंग पूरी तरह से डरा हुआ है. इसलिए वो घर के अंदर रह रहे हैं.
राम मंदिर पर केंद्र और यूपी सरकार आमने सामने
सपा सुप्रीमो ने राम मंदिर चढ़ावा और चंदा चोरी मामले में केंद्र की मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार के बीच पावर की लड़ाई करार दिया. उन्होंने कहा कि यह पावर की लड़ाई है. दिल्ली वाले कोई प्लान बना पाते, उससे पहले ही लखनऊ वाले ने एसआईटी बनाकर पूरा पावर अपने हाथ में ले लिया.
ये भी पढ़ें- मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में चार राज्यों से हटाए गए 22 लाख नाम, विपक्ष ने उठाए सवाल
SIT पर उन्होंने कहा कि अगर इस मामले में ED और CBI शामिल होती तो इसकी कमान केंद्र सरकार के हाथ में होती. उससे पहले ही लखनऊ वाले ने SIT गठित करके मामले को अपने हाथों में ले लिया. उन्होंने इसे पावर की लड़ाई करार दिया.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


