गुरमीत राम रहीम सिंह
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है. एसजीपीसी ने अपनी याचिका में हरियाणा सरकार बार-बार परोल या फरलो दिए जाने के खिलाफ दायर की गई थी. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति विशेष को मिली राहत को जनहित याचिका के माध्यम से कैसे चुनौती दी जा सकती है.
कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आदेश का उल्लंघन हो रहा है कि याचिकाकर्ता हाई कोर्ट जा सकता है. एसजीपीसी की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि राम रहीम को 2022 से अब तक कई बार परोल या फरलो दिया गया. वही राम रहीम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि एसजीपीसी की ओर से याचिका राजनीति प्रतिद्वंदिता के चलते दायर की गई है, जिसका एसजीपीसी के वकील ने विरोध किया. कहा कि जब राम रहीम खुद को धार्मिक व्यक्ति कहते हैं, तो फिर राजनीतिक प्रतिद्वंदिता की बात कहां से आ गई?
बता दें कि एसजीपीसी की ओर से दायर याचिका को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट खारिज कर चुका है. हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश दिया था कि इस मामले में वह नियमों के आधार पर फैसला ले. 18 अक्टूबर 2021 को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम और चार अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. मामले में अन्य आरोपी अवतार सिंह, कृष्ण लाल, जसबीर सिंह और सबदिल सिंह थे. मामले की सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी. करीब 22 साल पहले 10 जुलाई 2002 को सिरसा डेरे के प्रबंधक रणजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
2003 में जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया था. सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम समेत पांच लोगों ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया है. जिसके बाद सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम सहित सभी पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया और उम्र कैद की सजा सुनाई थी.
-भारत एक्सप्रेस
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