सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर समय रैना के रियलिटी शो इंडियाज गॉट लेटेंट में विवादित टिप्पणी को लेकर यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया के खिलाफ महारांष्ट्र से लेकर असम तक में FIR दर्ज हुई हैं. उनका केस देश के पूर्व चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ के बेटे अभिनव चंद्रचूड़ लड़ रहे हैं
बता दें कि अभिनव चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर के यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी और तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने रणवीर इलाहाबादिया की इस याचिकाओं को खारिज कर दिया. जिसके बाद अब याचिकाएं दो तीन दिन में कोर्ट की प्रोसीडिंग्स में लिस्ट की जाएंगी.
रणवीर इलाहाबादिया के हाई-प्रोफाइल केस में अब अभिनव चंद्रचूड़ की एंट्री ने सुप्रीम कोर्ट में हलचल मचा दी है. यह केस तब सुर्खियों में आया जब यह पता चला कि जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के रिटायर होने के बाद उनके बेटे अभिनव चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में केसों की पैरवी शुरू कर दी है. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 10 नवंबर 2014 को रिटायर हुए थे, और 11 नवंबर 2014 से ही अभिनव चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में केसों की पैरवी करना शुरू कर दिया.
याचिका की जल्द सुनवाई की मांग
हालांकि, इस पर पहले किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया था, लेकिन रणवीर इलाहाबादिया के मामले में अभिनव चंद्रचूड़ की एंट्री ने पूरे सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का विषय बना दिया। दिलचस्प बात यह है कि वे फिजिकली कोर्ट में पेश नहीं हुए, बल्कि वर्चुअली CJI कोर्ट से जुड़े और इस याचिका की जल्द सुनवाई की मांग की. CJI खन्ना ने इस मामले की सुनवाई के लिए तारीख तय नहीं की, लेकिन कहा कि इस केस पर जल्द ही सुनवाई की जाएगी
CJI के नक्शे कदम पर चल रहे अभिनव और चिंतन चंद्रचूड़
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जिन्हें मई 2016 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया था, नवंबर 2022 में CJI बने और दो साल तक इस पद पर रहे. इस पूरे 8 साल 6 महीने के दौरान अभिनव चंद्रचूड़ कभी सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं हुए. हालांकि, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने विदाई भाषण में अपने बेटों, अभिनव और चिंतन चंद्रचूड़, के बारे में बताया था. उन्होंने एक बार उनसे सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए कहा था ताकि वे उनसे बार-बार मिल सकें, लेकिन दोनों ने इससे इनकार कर दिया था.
यहां तक कि अगर कहा जाए कि अभिनव और चिंतन चंद्रचूड़ अपने पिता के नक्शे कदम पर चल रहे हैं, तो यह गलत नहीं होगा. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के पिता जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ के समय 1982 से 1985 तक उन्होंने देश की किसी भी अदालत में केस की पैरवी नहीं की थी, और इस दौरान उन्होंने हार्वर्ड में पढ़ाई की थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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