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इतिहास, संस्कृति और भविष्य एक मंच पर: गणतंत्र दिवस की झांकियों ने रचा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का दृश्य

कर्तव्य पथ पर इस साल की झांकियों ने भारत की शाही विरासत, वीरता और आधुनिक सोच को एक मंच पर उतारा. राजस्थान से गुजरात तक, हर राज्य ने अपनी अनोखी कहानी के जरिए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का संदेश दिया.

Republic Day Parade Tableaux

77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ केवल परेड का मंच नहीं बना, बल्कि भारत की संस्कृति, शौर्य और विकास यात्रा का जीवंत प्रदर्शन भी बना. अलग-अलग राज्यों की झांकियों ने इतिहास, लोककला, बलिदान और आधुनिक सोच को इतनी खूबसूरती से पेश किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए. हर राज्य अपनी अलग कहानी लेकर आया, लेकिन भाव एक ही था- एक भारत, श्रेष्ठ भारत.

राजस्थान: शाही विरासत और उस्ता कला का जादू

राजस्थान की झांकी ने कर्तव्य पथ पर एक शाही माहौल रच दिया. ‘मरुधरा’ ने बीकानेर की विश्वप्रसिद्ध उस्ता कला को केंद्र में रखा. झांकी की मेहराबें और कुप्पियां 24 कैरेट सोने के वर्क और प्राकृतिक रंगों से सजी थीं. इसके साथ पारंपरिक गेर नृत्य करते कलाकारों ने राजस्थान की जीवंत लोकसंस्कृति और शिल्प कौशल को भव्य रूप में पेश किया.

हिमाचल प्रदेश: देवभूमि से वीर भूमि तक

हिमाचल प्रदेश की झांकी ने यह संदेश दिया कि यह राज्य सिर्फ देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीर भूमि भी है. काठकुणी वास्तुकला के बीच राज्य के चार परमवीर चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं शिखर पर नजर आईं. मेजर सोमनाथ शर्मा से लेकर कैप्टन विक्रम बत्रा तक, देश के लिए बलिदान देने वाले 1,203 वीरों को श्रद्धांजलि दी गई. बर्फीली पहाड़ियों में तिरंगा फहराते सैनिकों का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था.

पंजाब: ‘हिंद दी चादर’ को नमन

पंजाब की झांकी गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित रही. दिल्ली के गुरुद्वारा सीस गंज साहिब की हूबहू प्रतिकृति, ‘एक ओंकार’ का स्वरूप और रागी सिंहों का शब्द कीर्तन पूरे वातावरण को भक्तिमय बना गया. भाई मति दास और भाई सती दास के बलिदान को भी दर्शाया गया, जो धर्म और मानव गरिमा की रक्षा का संदेश देता है.

उत्तर प्रदेश: विरासत के साथ आधुनिक रफ्तार

उत्तर प्रदेश की झांकी में बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास एक साथ दिखा. कालिंजर किले का एकमुख शिवलिंग आकर्षण का केंद्र रहा. ‘एक जनपद एक उत्पाद’ के तहत मिट्टी के बर्तन और शिल्प दिखाए गए, जबकि एक्सप्रेस-वे और उद्योगों ने यूपी की आधुनिक प्रगति को रेखांकित किया.

छत्तीसगढ़: आदिवासी शौर्य की गाथा

छत्तीसगढ़ की झांकी ने आदिवासी नायकों के संघर्ष को सामने रखा. वीर गुंडाधुर और वीर नारायण सिंह की प्रतिमाएं प्रमुख रहीं. नवा रायपुर का डिजिटल म्यूजियम भी दिखाया गया, जो आधुनिक तकनीक से आदिवासी विद्रोहों की कहानियों को सहेज रहा है.

असम: टेराकोटा कला और आत्मनिर्भरता

असम की झांकी धुबरी की टेराकोटा कला पर आधारित थी. विशाल मयूरपंखी नाव के आकार की झांकी में हीरामति मिट्टी से मूर्तियां बनाते कलाकार और मेखला-चादर पहने लोकनृत्य करती महिलाएं असम की कलात्मक पहचान को दर्शा रही थीं.

गुजरात: ‘वंदे मातरम’ और आजादी का स्वर

गुजरात की झांकी ने ‘वंदे मातरम’ के 150 साल और मैडम भीखाजी कामा के योगदान को सलाम किया. 1907 में पेरिस में फहराए गए भारतीय ध्वज का दृश्य और गांधी-चरखे के जरिए आत्मनिर्भर भारत का संदेश झांकी की खास पहचान रहा.

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-भारत एक्सप्रेस



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