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इंदौर से नहीं लिया सबक, MP में पानी का खूनी खेल जारी: कभी इंसान, कभी तोते, तो अब रिहंद डेम की मछलियां बनीं शिकार!

मध्यप्रदेश-यूपी सीमा पर स्थित रिहंद जलाशय में हजारों मछलियों की रहस्यमयी मौत ने औद्योगिक प्रदूषण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों ने NTPC संयंत्रों से जहरीला पानी छोड़े जाने का आरोप लगाते हुए तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है..

Rihand Dam Fish Death: मध्यप्रदेश में औद्योगिक लापरवाही और प्रदूषित पानी का जानलेवा खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार (19 मई 2026) की सुबह मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित रिहंद जलाशय (डेम) के किनारे अचानक हजारों मछलियां मृत अवस्था में तैरती मिलीं. दरअसल इस ताज़ा घटना ने पूरे इलाके में तबाही और दहशत का माहौल बना दिया है.

वहीं स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि एनटीपीसी (NTPC) संयंत्रों से निकलने वाला जहरीला और केमिकल युक्त पानी लगातार इस डेम में छोड़ा जा रहा है, जिससे पूरा पानी दमघोंटू जहर बन चुका है. लेकिन इस गंभीर मुद्दे पर जब जिला कलेक्टर से जवाब मांगा गया, तो वे दो घंटे इंतजार कराने के बाद बिना कुछ बोले निकल गए.

इंदौर में गंदे पानी ने ली थी 21 मासूमों की जान

रिहंद जलाशय की इस ताजा लापरवाही (Rihand Dam Fish Death) ने साबित कर दिया है कि प्रशासन ने इंदौर के उस खौफनाक हादसे से कोई सबक नहीं सीखा है. ज्ञात रहे इसी साल जनवरी 2026 की शुरुआत में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में नगर निगम की घोर लापरवाही के चलते पीने वाली मुख्य नर्मदा पाइपलाइन में गटर का गंदा पानी मिक्स हो गया था. उस दूषित पानी को पीते ही पूरे इलाके में महामारी फैल गई थी और देखते ही देखते 21 निर्दोष लोगों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी, जबकि दर्जनों लोग अस्पताल पहुंचे थे.

खरगोन में भी तड़पकर गिरे थे 200 तोते

याद रहे इंदौर की उस दर्दनाक घटना के समानांतर ही जनवरी 2026 में खरगोन जिले के बड़वाह से भी प्रकृति को रुला देने वाली खबर आई थी. वहां पवित्र नर्मदा नदी पर बने एक्वाडक्ट पुल के पास अचानक 200 से अधिक तोते, कबूतर और गौरैया मृत पाए गए थे. हरे-भरे पेड़ों पर चहकने वाले इन बेजुबान पक्षियों की इस तरह अचानक हुई सामूहिक मौत के पीछे भी नदी के आसपास फैला केमिकल प्रदूषण और दूषित पानी का सेवन ही मुख्य वजह माना गया था, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया था.

MP में नहीं थम रहा पानी का खूनी खेल(MP Water Pollution)

अगर मध्यप्रदेश में पानी से मचे इस हाहाकार (Rihand Dam Fish Death) के घटनाक्रम को देखें, तो कड़ियाँ साफ जुड़ती हैं:

जनवरी 2026 (शुरुआत): इंदौर के भागीरथपुरा में सीवेज का पानी नर्मदा लाइन में मिलने से 21 लोगों की मौत हुई.

जनवरी 2026 (मध्य): खरगोन के बड़वाह में नर्मदा पुल के पास प्रदूषण के चलते 200 से ज्यादा तोते तड़पकर मरे.

19 मई 2026 (आज सुबह): इन दोनों पुरानी घटनाओं से बिना कोई सबक लिए, सिंगरौली के रिहंद जलाशय में औद्योगिक कचरे के कारण हजारों मछलियों की सामूहिक मौत हो गई.

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जनता में भारी आक्रोश

चाहे जनवरी में इंसानी जान हो, बेजुबान पक्षी हों या आज पानी की मछलियां…हर कोई इस प्रशासनिक और औद्योगिक लापरवाही की भारी कीमत चुका रहा है. वर्तमान में सिंगरौली से लेकर इंदौर तक की जनता में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ भारी गुस्सा है. स्थानीय लोग अब रिहंद जलाशय के पानी की तत्काल लैब टेस्टिंग और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि इस खूनी खेल को हमेशा के लिए रोका जा सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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