आज का दिन भारत के इतिहास में एक बेहद खास और गौरवशाली स्थान रखता है. आज यानी 14 मई को देश ‘धर्मवीर’ छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती मना रहा है. इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं. संभाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं थे, बल्कि वह उस अदम्य साहस और अडिग विश्वास का नाम थे, जिसने मुगलों की विशाल सेना को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था.
वो योद्धा जिसने कभी हार नहीं मानी
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बेहद भावुक और प्रेरक पोस्ट साझा की. उन्होंने बताया कि कैसे संभाजी महाराज ने बचपन से ही राष्ट्रप्रेम, धर्म की रक्षा और ‘हिंदवी स्वराज’ के संस्कारों को अपने भीतर उतार लिया था.
बाल्यकाल से ही राष्ट्रप्रेम, धर्मरक्षा और हिन्दवी स्वराज के संस्कारों को आत्मसात करने वाले छत्रपति संभाजी महाराज जी ने अनेक रणनीतिक क्षेत्रों को मुगलों के कब्जे से मुक्त कराया तथा अनगिनत युद्धों में मुगल सेना को परास्त किया। धर्मांतरण को रोकने के लिए आजीवन कटिबद्ध छत्रपति संभाजी… pic.twitter.com/jtZtHeywqv
— Amit Shah (@AmitShah) May 14, 2026
संभाजी महाराज का जीवन ऐसा है जिसमें हर मोड़ पर साहस और संघर्ष है. उन्होंने अपने जीवनकाल में मुगलों के खिलाफ अनगिनत युद्ध लड़े और उन्हें धूल चटाई. अमित शाह ने अपनी पोस्ट में इस बात का खास जिक्र किया कि कैसे महाराज ने कई रणनीतिक क्षेत्रों को मुगलों के कब्जे से आजाद कराया. उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका संकल्प था कि चाहे कुछ भी हो जाए, स्वधर्म, स्वभाषा और स्वराज की मशाल बुझनी नहीं चाहिए.
बलिदान की अमर कहानी
आज के दौर में जब हम अपनी संस्कृति और भाषा की बात करते हैं, तो संभाजी महाराज का जीवन हमें सिखाता है कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितना जरूरी है. उन्होंने धर्मांतरण के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया और अंततः धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी, लेकिन कभी झुके नहीं. यही कारण है कि आज भी लाखों भारतीय उन्हें अपना आदर्श मानते हैं.
पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए रचा इतिहास
14 मई 1657 को जन्मे संभाजी महाराज, महान छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र थे. उन्होंने अपने पिता द्वारा जलाई गई स्वाधीनता की लौ को न केवल जलाए रखा, बल्कि उसे और भी प्रज्वलित किया. मुगलों के विरुद्ध उनके संघर्ष ने ये साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी साम्राज्य आपको हरा नहीं सकता.
-भारत एक्सप्रेस
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