Sanskar Bharti Kala Sankul: नई दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित संस्कार भारती के कला संकुल में विचार और रचनात्मकता पर आधारित संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस संगोष्ठी का मुख्य फोकस कला और शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय दृष्टिकोण रहा. कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत और कथक की प्रस्तुतियों ने इसे और खास बना दिया. मुख्य अतिथि सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT) के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुकर, संगोष्ठी संयोजिका श्रुति सिन्हा, सह संयोजक श्री विश्वदीप, कार्यक्रम संयोजिका साक्षी शर्मा एवं स्नेहा मुखर्जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्रीय गायक साद्यांत कौशल की राग दरबारी से हुई, जिसने माहौल को सुरों से भर दिया.

मुख्य अतिथि का संबोधन
सांस्कृतिक संसाधन एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT) के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुकर ने भारतीय दृष्टि से कला जगत में CCRT की भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि संस्थान कला, संस्कृति, गीत, संगीत और नाटक के क्षेत्र में लगातार योगदान दे रहा है. साथ ही उन्होंने कलाकारों को प्रोत्साहित किया और कला की बारीकियों पर चर्चा की.

स्नेहा मुखर्जी और नंदलाल गंधर्व ने की सराहना
पुष्कला संगीत केंद्र की निर्देशिका सह कथक नृत्यांगना स्नेहा मुखर्जी ने कहा कि आज संस्कार भारती के कला संकुल में प्रस्तुतियां थी. प्रति माह आखिरी रविवार को हम ये संगोष्ठी करते हैं. लोगों से अपील है कि लोग जरूर इसे देखने आएं और हमारे परिवार का हिस्सा बनें.

संगीत अध्यापक नंदलाल गंधर्व ने अपने शिष्य रचना, कौशल और ऊर्जा अक्षरा की प्रस्तुति की सराहना करते हुए मेरे शिष्य संगीत से बहुत प्रेम करते हैं. आज इनकी प्रस्तुति बहुत ही अच्छी रही. ऊर्जा बहुत ही अच्छा गायन करती हैं. वो गायन के अनेक विधाओं का अभ्यास करती हैं. सभी के अंदर सीखने की बहुत अच्छी भावनाएं हैं.

कविताएं और गजलें
प्रोफेसर डॉ. रचना ने अपनी स्वरचित कविताओं से कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके बाद शायर नासिर काजिम की गजल को आवाज दी गई. “नीयत-ए-शौक़ भर न जाये कहीं, तू भी दिल से उतर न जाये कहीं.” इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनाओं से जोड़ दिया.

ऊर्जा अक्षरा की प्रस्तुति
शास्त्रीय संगीत गायिका ऊर्जा अक्षरा ने शायर मुनीर नियाजी की गजल को अपने सुरों से संवारा, “आ गई याद शाम ढलते ही, बुझ गया दिल चराग़ जलते ही.” उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी.

कार्यक्रम में कथक की झलक
संगीत के बाद कथक नृत्य की प्रस्तुति हुई. अपर्णा सराठे और अमन पांडे ने अपनी कला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. दर्शक कथक देखकर आनंदित हुए और कलाकारों ने संस्कार भारती के इस आयोजन की सराहना की.

इन कलाकारों की रही सहभागिता
संगोष्ठी में कला, संस्कृति, साहित्य एवं समाज से जुड़े अनेक विद्वान, कलाकार और युवा प्रतिभागी उपस्थित रहे. कार्यक्रम का समापन सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण और भारतीय कला की निरंतरता के संकल्प के साथ हुआ.

मासिक गोष्ठी के आयोजन को सफल बनाने में संगोष्ठी टोली सदस्य एवं रंगकर्मी हर्षित गोयल, टोली सदस्या नृत्यांगना स्नेहा मुखर्जी,समीक्षक एवं टोली सदस्य गरिमा रानी,तबला वादक श्री प्रदीप पाठक, कथक छात्रा सुश्री प्रियंका,निधि तिवारी, सुश्री दीप्ति,श्री बृजेश कुमार,श्री विजेंदर कुमार,सुशांक एवं श्री मृत्युंजय जी ने प्रमुख भूमिका निभाई. कार्यक्रम का सफल संचालन श्री कुलदीप शर्मा ने किया.

ये भी पढ़ें-नरसपुरम की लेस कला पर फिदा हुए पीएम मोदी, CM नायडू ने कहा ‘शुक्रिया’
जाहिर है, ऐसे आयोजन कला को समझने और उसे नई गति देने में अहम भूमिका निभाते हैं. विचार और रचनात्मकता पर आधारित इस संगोष्ठी के साथ शास्त्रीय संगीत और कथक की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को शिखर पर पहुंचा दिया.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

