तपुर तहसील कार्यालय में पानी रोकने के लिए लगाए गए प्लास्टिक के डिब्बे. (PC: भारत एक्सप्रेस)
Shahdol News:अनिल पाण्डेय/शहडोल : जरा सोचिए, जिस सरकारी दफ्तर में बैठकर अधिकारी पूरी तहसील की समस्याओं का समाधान करते हैं, वही दफ्तर अगर खुद बारिश के पानी से बचने के लिए ‘प्लास्टिक के डिब्बों’ का सहारा लेने लगे तो आप क्या कहेंगे? शहडोल के जैतपुर तहसील से बदहाली की ऐसी ही एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है.
जैतपुर तहसील दफ्तर में टपकती छत का स्थायी इलाज करने के बजाय बारिश का पानी रोकने के लिए जगह-जगह बाल्टियां और टब सजा दिए गए हैं. इतना ही नहीं, सीपेज की वजह से दीवारों और कंप्यूटरों में करंट आने लगा है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
पानी सीधे कमरों के अंदर टपक रहा
शहडोल जिले के अंतर्गत आने वाले जैतपुर तहसील कार्यालय की पुरानी इमारत इन दिनों भारी बारिश का कहर झेलने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है. आम जनता के काम निपटाने वाले इस सरकारी दफ्तर की छत कई जगहों से दरक चुकी है, जिससे पानी सीधे कमरों के अंदर टपक रहा है.
पक्का इंतजाम करने के बजाय अनूठा ‘सरकारी जुगाड़’
इस जलभराव और सीपेज से निपटने के लिए दफ्तर में कोई पक्का इंतजाम करने के बजाय अनूठा ‘सरकारी जुगाड़’ लगाया गया है. टपकती छत की बूंदों के ठीक नीचे प्लास्टिक के बड़े डिब्बे, बाल्टियां और टब रख दिए गए हैं. आलम यह है कि पूरे तहसील परिसर में डिब्बों की कतार दिखाई दे रही है, जिससे दफ्तर की हालत किसी अस्तबल जैसी नजर आ रही है.
नागरिक हादसे के खौफ में रहने को मजबूर
पानी का यह रिसाव अब कर्मचारियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. दीवारों में भयानक नमी फैलने की वजह से बिजली के बोर्ड, तारों और कंप्यूटर सिस्टम में हल्का करंट उतरने लगा है. कंप्यूटर ऑपरेटरों का कहना है कि काम करते वक्त उन्हें बिजली के झटके महसूस हो रहे हैं. जर्जर इमारत की इस बदहाली के बीच कर्मचारी और काम के सिलसिले में आने वाले नागरिक हादसे के खौफ में रहने को मजबूर हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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