Shahdol pond scam
Shahdol pond scam: शहडोल/ अनिल पांडेय: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण विकास योजनाओं में बड़े पैमाने पर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है. आरोप है कि हाईवे निर्माण के दौरान बने गड्ढों, वर्षों पुराने तालाबों और पहले से मौजूद जल संरचनाओं को सरकारी रिकॉर्ड में नवीन तालाब दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया. मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश देने की बात कही है.
गड्ढे को बताया नया तालाब, 25 लाख रुपये की स्वीकृति
आरोपों के मुताबिक, जयसिंहनगर जनपद की जोरा ग्राम पंचायत में रीवा-शहडोल हाईवे निर्माण के दौरान मिट्टी निकालने से सड़क किनारे करीब दो से ढाई एकड़ का बड़ा गड्ढा बन गया था. दावा है कि इसी गड्ढे को नया तालाब बताकर लगभग 25 लाख रुपये स्वीकृत कर दिए गए.
इसी तरह बरना पंचायत के झिरिया गांव में करीब 20 साल पुराने तालाब को नया निर्माण बताकर 20.56 लाख रुपये की लागत से स्वीकृति दी गई. जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां नया तालाब नहीं बना, बल्कि पहले से मौजूद जलाशय को ही नया दिखाया गया.
पहले से बने ढांचे पर दोबारा खर्च का आरोप
ब्यौहारी ब्लॉक के तेंदुआ गांव में भी इसी तरह का मामला सामने आया है. यहां बाणसागर डैम के पास दर्री नाले पर पहले ही डीएमएफ (DMF) मद से करीब 12 लाख रुपये की लागत से पुलिया और पिचिंग का कार्य कराया जा चुका था. आरोप है कि बाद में उसी स्थान को सांसद निधि से 25 लाख रुपये की लागत वाले नवीन तालाब के रूप में स्वीकृत कर भुगतान भी कर दिया गया, जबकि मौके पर कोई नया तालाब नहीं मिला.
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43 परियोजनाओं पर खर्च, कई पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 की कार्ययोजना में डीएमएफ मद से तालाब निर्माण, घाट निर्माण और सौंदर्यीकरण से जुड़े 43 प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए थे. इन योजनाओं के लिए करीब 7.48 करोड़ रुपये की स्वीकृति और लगभग 5.75 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया. आरोप है कि इनमें से कई परियोजनाएं ऐसे स्थानों पर स्वीकृत हुईं, जहां पहले से तालाब या अन्य जल संरचनाएं मौजूद थीं.
जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामले पर जिला कलेक्टर ने कहा है कि यदि पुराने तालाबों या पहले से मौजूद संरचनाओं को नया निर्माण दिखाकर भुगतान किया गया है, तो यह नियमों के खिलाफ है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच के लिए जिला स्तरीय टीम गठित की जाएगी. जांच में यदि अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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