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माघ मेला विवाद: बिना स्नान लौटे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, सरकार पर लगाया दोहरे चरित्र का आरोप

Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy: प्रयागराज माघ मेले में प्रशासन से विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना संगम स्नान किए लौट गए. उन्होंने सरकार पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा.

Shankaracharya Avimukteshwaranand

Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy:  प्रयागराज में माघ अमावस्या के दिन से ही प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच संघर्ष जारी है. अब अविमुक्तेश्वरानंद ने घोषणा की है कि वे माघ मेले से बिना स्नान किए जा रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा और कहा कि ये सभी दोहरे चरित्र वाले लोग हैं. एक तरफ सनातन धर्म की बात करते हैं और दूसरी तरफ शंकराचार्य, बटुकों और ब्राह्मणों का अपमान करते हैं.

संगम स्नान किए बिना लौटे शंकराचार्य

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने घोषणा की है कि वे संगम में स्नान किए बिना माघ मेले से लौटेंगे. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “अगर प्रशासन अपनी गलती के लिए क्षमा-याचना कर सकता है, तब तो ठीक है, बाकी हमें आपसे कुछ नहीं चाहिए. जो हमारा है, वह आपको हमें देना ही होगा, अगर आज नहीं तो कल. यह हमारा अधिकार है, आपकी तरफ से दिया गया दान नहीं. जिस असली मुद्दे के लिए हम दस दिन शांतिपूर्वक बैठे रहे, उसे नजरअंदाज किया जा रहा है. हमने आपको विचार करने और अन्याय के परिणामों का सामना करने या माफी मांगने के लिए पर्याप्त समय दिया. लेकिन 10-11 दिन बाद भी, जब हमने जाने का फैसला किया, तो हमारे सामने इस तरह का प्रस्ताव आया है.”

उन्होंने आगे कहा, “हमने प्रस्ताव को ठुकरा दिया है क्योंकि ये उस दिन आया है, जब हम बिना स्नान किए वापस जा रहे हैं. प्रस्ताव को अगर स्वीकार कर लेते तो ये हमारे धर्म, हमारे और शिष्यों के साथ हुए अत्याचार को भूलने जैसा होता. हमारा मन बहुत भारी है, लेकिन जो चीजें ब्राह्मणों और शंकराचार्य के साथ औरंगजेब के समय नहीं हुईं, वो तथाकथित हिंदू सरकारों के राज में हो रही हैं.”

सरकरा के प्रस्ताव को ठुकराया

विवाद को शांत करने के लिए प्रशासन ने जो प्रस्ताव भेजे थे, उनमें सम्मान तो था लेकिन ‘पश्चाताप’ नहीं. जानिए शंकराचार्य ने किन प्रस्तावों को अस्वीकार किया. प्रशासन ने प्रस्ताव दिया कि महाराज जी जब भी चाहें, उन्हें पूरी गरिमा और पालकी के साथ स्नान के लिए ले जाया जाएगा. जिस दिन विवाद हुआ, उस दिन मौजूद सभी अधिकारियों को स्वागत में उपस्थित रहने की बात कही गई. शंकराचार्य के मार्ग में फूलों की वर्षा करने का भी प्रस्ताव दिया गया.


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अमित शाह पर भी साधा निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर अविमुक्तेश्वरानंद ने निशाना साधते हुए कहा, “एक तरफ देश के गृह मंत्री कहते हैं कि साधु-संतों पर अत्याचार करने वाली और सनातनियों की सुध न लेने वाली सरकारें कभी भी स्थायी नहीं हो सकती हैं. एक तरफ इतना बड़ा ज्ञान दिया जा रहा है और दूसरी तरफ हिंदू धर्म के सबसे बड़े प्रतीक शंकराचार्य, ब्राह्मण, बटुक और संन्यासियों पर अत्याचार किया जा रहा है. ये सरकार का दोहरा चरित्र है, जिसके बारे में जनता को पता होना चाहिए.”

-भारत एक्सप्रेस



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