Bharat Express DD Free Dish

शारदा सिन्हा को मरणोपरांत दिया जाएगा पद्म विभूषण, इससे पहले भी कई अन्य सम्मान से नवाजी जा चुकी हैं बिहार कोकिला

संगीत के प्रति उनके योगदान को देखते हुए शारदा सिन्हा को 1991 में ‘पद्म श्री’ और 2018 में ‘पद्म भूषण’ जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए. इसके अलावा, उन्हें ‘बिहार गौरव’, ‘भिखारी ठाकुर सम्मान’ और ‘मिथिला विभूति’ जैसे कई सम्मान भी मिले हैं.

Sharda Sinha

शारदा सिन्हा.

Padma Vibhushan 2025: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की. सरकार ने 2025 के लिए 139 पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया. ओसामु सुजुकी, शारदा सिन्हा, समेत 7 हस्तियों को पद्म विभूषण सम्मान दिया गया. वहीं, पंकज उधास और सुशील मोदी समेत 19 हस्तियों को पद्म भूषण के लिए चुना गया. इनके अलावा, राजस्थान की लोक गायिका बतूल बेगम, दिल्ली की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरजा भटला समेत 113 हस्तियों को इस बार पद्म श्री से सम्मानित किया जाएगा.

ये सम्मान देश के विभिन्न क्षेत्रों में अद्वितीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिया जाता है. पद्म पुरस्कारों में तीन श्रेणियां होती हैं – पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री. इस बार भी कई गुमनाम नायकों को उनके अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित होंगे.

शारदा सिन्हा: भारत की भूषण

छठ गीतों के लिए देश भर में पहचानी जाने वाली और बिहार कोकिला के नाम से मशहूर लोक गायिका शारदा सिन्हा को भी पद्म विभूषण पुरूस्कार दिया जाएगा. उन्हें यह अवार्ड मरणोपरांत मिलेगा. शारदा सिन्हा का बीते 5 नवंबर को दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया था. उन्हें अपनी सुरीली आवाज से न सिर्फ मैथिली और भोजपुरी संगीत को नई पहचान दी, बल्कि हिंदी सिनेमा में भी अपनी जगह बनाई. शारदा सिन्हा को इससे पहले भी कई अन्य पुरूस्कारों से नवाजा जा चुका है, जिनमें पदम श्री और पदम भूषण शामिल है.

सुपौल जिले में हुआ था जन्म

1 अक्टूबर 1952 को बिहार के सुपौल जिले के हुलास गांव में जन्मी शारदा को बचपन से ही संगीत का गहरा शौक था. उनकी शादी बेगूसराय जिले के सिहमा गांव में हुई थी, जहां उन्होंने मैथिली लोक संगीत से जुड़ी परंपराओं को अपनाया और अपनी गायकी में समाहित किया. समस्तीपुर महिला कॉलेज में संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष रहने के दौरान भी उन्होंने सैकड़ों पारंपरिक लोक गीत गाए, जिनसे बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को और भी ज्यादा समृद्ध किया.

छठ पूजा के गीत ने दिलाई अलग पहचान

शारदा सिन्हा की गायकी में एक खास बात यह है कि उन्होंने लोक संगीत को आधुनिकता से जोड़ा. उन्होंने भोजपुरी, मैथिली, मगही, और हिंदी में गाने गाए, लेकिन उनका नाम सबसे ज्यादा छठ पूजा के गीतों से जुड़ा हुआ है. उनके द्वारा गाए गए प्रसिद्ध छठ गीत ‘केलवा के पात पर उगलन सूरजमल झुके झुके’ और ‘सुनअ छठी माई’ आज भी इस पर्व का अहम हिस्सा माने जाते हैं.

पहले भी मिला सम्मान

संगीत के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उन्हें 1991 में ‘पद्म श्री’ और 2018 में ‘पद्म भूषण’ जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए. इसके अलावा, उन्हें ‘बिहार गौरव’, ‘भिखारी ठाकुर सम्मान’ और ‘मिथिला विभूति’ जैसे कई सम्मान भी मिले हैं.

बॉलीवुड में छाया गायकी का जलवा

शारदा सिन्हा ने बॉलीवुड में भी अपनी गायकी का जलवा दिखाया. सलमान खान की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ का गाना ‘कहे तो से सजना’ उनकी आवाज में बेहद लोकप्रिय हुआ. इसके अलावा, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर-2’ और ‘चारफुटिया छोकरे’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी आवाज दी.


ये भी पढ़ें: कुवैत की योगा ट्रेनर से लेकर भारतीय वेदांत का प्रचार-प्रसार करने वाले ब्राजील के Jonas Masetti तक, पद्म पुरष्कार से सम्मानित होंगी ये हस्तियां


-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read