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60 साल में 6 बार टूटी शिवसेना, उद्धव माथे सबसे बड़ा ‘कलंक’; देखें 1991 से 2026 तक की पूरी टाइमलाइन

Shiv Sena Split History: शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस शिंदे और उद्धव गुट के अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन के साथ मनाया जा रहा है. जानिए 1991 से लेकर 2026 के ‘ऑपरेशन टायगर’ तक शिवसेना में हुए सभी 6 बड़े विद्रोहों और टूट का पूरा इतिहास.

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Shiv Sena Split History: महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और बेहद गहमागहमी भरा दिन है. 19 जून 1966 को दिवंगत बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित की गई शिवसेना आज अपने सफर के 60वें साल में प्रवेश कर रही है. इस मौके पर मुंबई की सड़कों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक ‘असली विरासत’ को लेकर एक बार फिर भीषण शक्ति प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया है. हालांकि, इस खौस मौके के दौरान ही उद्धव ठाकरे के गुट वाली शिवसेना में फिर से बगावत की बात शुरू हो गई है. आइये जानें अब तक कितनी बार इसमें टूट हुई है.

एक तरफ जहां मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना गोरेगांव स्थित ‘नेस्को सेंटर’ (NESCO Centre) में करीब 30 हजार से अधिक पदाधिकारियों, विधायकों और सांसदों की भारी भीड़ जुटाकर हुंकार भर रही है, वहीं दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) सायन के ‘शन्मुखानंद हॉल’ (Shanmukhananda Hall) में अपने वफादार कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए भावनात्मक राजनीतिक संदेश दे रही है.

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60 साल में 6 बार टूटी शिवसेना (Shiv Sena Breakdown Timeline)

बालासाहेब की उंगली पकड़कर चलने वाले इस संगठन को सबसे गहरे और जानलेवा जख्म उसी दौर में मिले हैं, जब इसकी कमान उद्धव ठाकरे के हाथों में आई. आइए जानते हैं शिवसेना के इतिहास में हुए उन 6 बड़े विद्रोहों की पूरी टाइमलाइन

1. साल 1991: छगन भुजबल का पहला बड़ा विद्रोह

शिवसेना के इतिहास में पहला बड़ा सांगठनिक झटका साल 1991 में लगा, जब कद्दावर ओबीसी नेता छगन भुजबल ने 17 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ दी थी. भुजबल ने तत्कालीन शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे की कार्यशैली पर खुले सवाल उठाए थे और पार्टी के भीतर अपनी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया था. हालांकि, बालासाहेब के रसूख के आगे यह बगावत पार्टी का वजूद नहीं हिला सकी.

2. साल 2003: उद्धव राज का आगाज और टूट की शुरुआत

यह साल शिवसेना के इतिहास का टर्निंग पॉइंट माना जाता है. साल 2003 में महाबलेश्वर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उद्धव ठाकरे को शिवसेना का कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया गया. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इसी फैसले के बाद से पार्टी के भीतर असंतोष का ऐसा बीज पड़ा, जिसके बाद पार्टी के भीतर एक के बाद एक 4 बड़े दलबदल और विभाजन देखने को मिले.

3. साल 2005: नारायण राणे की खुली बगावत

उद्धव ठाकरे को पार्टी का उत्तराधिकारी बनाए जाने और उनके कामकाज के तौर-तरीकों का सबसे पहला प्रखर विरोध पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने किया. साल 2005 में राणे ने उद्धव के नेतृत्व को सीधी चुनौती दी. इसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया और वे अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए. इस टूट ने कोंकण क्षेत्र में शिवसेना को भारी नुकसान पहुंचाया.

4. साल 2006: राज ठाकरे का जाना पारिवारिक विभाजन

बालासाहेब ठाकरे के भतीजे और पार्टी के सबसे आक्रामक चेहरे राज ठाकरे को शिवसैनिकों में बालासाहेब की छवि दिखती थी. लेकिन उद्धव ठाकरे से वैचारिक मतभेदों और पार्टी में किनारे किए जाने से नाराज होकर साल 2006 में राज ठाकरे ने भारी मन से शिवसेना छोड़ दी. उन्होंने अपनी नई पार्टी ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ (MNS) की स्थापना की, जिसने शिवसेना के पारंपरिक मराठी कोर-वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई.

5. साल 2022: एकनाथ शिंदे का महा-विद्रोह

जून 2022 में इतिहास का सबसे विनाशकारी तूफान आया. एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे की कार्यशैली और कांग्रेस-एनसीपी के साथ अप्राकृतिक गठबंधन के खिलाफ विद्रोह करते हुए पूरे 40 विधायकों के साथ बगावत कर दी. इस महा-विद्रोह के चलते उद्धव ठाकरे को न सिर्फ मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, बल्कि चुनाव आयोग (ECI) के फैसले के बाद शिवसेना का मूल नाम और ‘तीर-कमान’ का पारंपरिक चुनाव चिह्न भी हमेशा के लिए छिन गया. उद्धव के हिस्से सिर्फ ‘मशाल’ आई.

6. साल 2026: लोकसभा में ‘ऑपरेशन टायगर’

बगावत का यह सिलसिला थमा नहीं है. साल 2026 के इस जून महीने में, जब पार्टी अपना 60वां स्थापना दिवस मना रही है, उद्धव ठाकरे के माथे पर सबसे नया दाग लगा है. लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 सांसदों (संजय जाधव, ओमराजे निंबालकर समेत) ने पाला बदल लिया है और संसद में अलग गुट बनाने के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंप दिया है. ये सभी बागी सांसद एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली मूल शिवसेना में विलय की अंतिम तैयारी में हैं, जिससे उद्धव का राष्ट्रीय वजूद खतरे में पड़ गया है.

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संसदों को जारी हुआ नोटिस (Maharashtra Shiv Sena UBT Rebellion)

इस जश्न के पीछे की कड़वी सच्चाई यह है कि शिवसेना में बगावत का दौर आज भी लगातार जारी है. ‘ऑपरेशन टायगर’ के तहत लोकसभा में उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसदों ने ऐन स्थापना दिवस से पहले बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है. शिवसेना (UBT) ने इन सभी 6 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है, जिसने पार्टी के भीतर की तकरार को चरम पर पहुंचा दिया है.



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