Karnataka politics: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पद से इस्तीफा देने के बाद दिल्ली का रुख किया है. शुक्रवार को उनकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात तय है. इस्तीफे के बाद भी वह चर्चा में बने हुए हैं और साफ कर दिया है कि वह राज्य की राजनीति से अलग नहीं होंगे.
राज्यसभा का ऑफर ठुकराया
सिद्धारमैया ने गुरुवार को खुलासा किया कि कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. उनका कहना है कि फिलहाल राष्ट्रीय राजनीति में उनकी कोई रुचि नहीं है. उन्होंने कहा कि वह अपने विधानसभा क्षेत्र वरुणा से विधायक बने रहेंगे और बाकी बचे दो साल तक जनता की सेवा करेंगे.
इस्तीफे के बाद भी असर बरकरार
कर्नाटक में सत्ता हस्तांतरण को आसान माना जा रहा था, लेकिन सिद्धारमैया के इस्तीफे ने कांग्रेस के भीतर नई राजनीतिक स्थिति पैदा कर दी है. मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बावजूद उनका प्रभाव पार्टी और राज्य की राजनीति में बना हुआ है.
जनता के बीच सक्रिय रहने का वादा
बेंगलुरु में राज्यपाल के विशेष सचिव को इस्तीफा सौंपने के बाद सिद्धारमैया ने कहा कि वह आगे भी कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहेंगे. उन्होंने दोहराया कि विधायक के रूप में उनका कार्यकाल अभी बाकी है और वह अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करते रहेंगे.
सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई
अपनी आगे की योजना बताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह राजनीति में सक्रिय रहेंगे और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे. उनका कहना है कि जनता ने उन्हें जिम्मेदारी दी है और वह उसे निभाते रहेंगे.
इस्तीफे की वजह
सिद्धारमैया ने इस्तीफे के पीछे की वजह पर कहा कि वह पहले से ही स्पष्ट कर चुके थे कि जब भी पार्टी नेतृत्व उनसे पद छोड़ने को कहेगा, वह तुरंत ऐसा करेंगे. उन्होंने कहा कि इसमें किसी तरह का दबाव नहीं था, बल्कि उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया.
आगे की राह
सिद्धारमैया ने साफ किया कि उनका ध्यान केवल कर्नाटक की राजनीति पर रहेगा. उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है और राज्य में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे.
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-भारत एकसप्रेस
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