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Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में तीन बार एकछत्र राज करने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सितारे इस वक्त गर्दिश में नजर आ रहे हैं. सूबे की सत्ता हाथ से जाते ही टीएमसी के भीतर एक ऐसा भूचाल आ गया है, जिसे संभालना अब ‘दीदी’ के बस से बाहर होता जा रहा है. कल तक जो नेता ममता बनर्जी के सामने सिर झुकाकर खड़े रहते थे, आज वही उनके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल चुके हैं. हालत ये हो गई है कि अब सीधे ममता बनर्जी को नेतृत्व से हटाने और पार्टी को आई-पैक (I-PAC) के चंगुल से आजाद कराने की मांग उठने लगी है.
पार्षदों से लेकर राज्यसभा सांसदों तक, टीएमसी में इस वक्त इस्तीफों की झड़ी लगी हुई है. पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन ने ये कहते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा दे दिया कि भ्रष्टाचार और आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घिनौनी घटनाओं का टीवी पर बचाव करते-करते अब उनकी अंतरात्मा मर चुकी है.
‘ममता बनर्जी को हटाओ… मुझे डर नहीं लगता’
ममता बनर्जी के चार दशक पुराने साथी और कोलकाता के कद्दावर पार्षद तारक सिंह ने तो बगावत की सारी हदें पार कर दी हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में कैमरे पर ऑन-रिकॉर्ड कहा, ‘मैं सीधे तौर पर नेतृत्व बदलना चाहता हूं. जो नेतृत्व पूरी तरह फेल हो चुका है, जो कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा नहीं हो सकता, वो क्या करेगा.’
उन्होंने ये भी कहा कि ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? मुझे पार्टी से निकाल देंगे? निकाल दें, मुझे कोई परवाह नहीं. तारक सिंह ने ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे उस इंसान के खिलाफ हैं जिसने अभिषेक को बढ़ावा दिया.
‘कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगी TMC’
पार्टी के सबसे सीनियर नेताओं में शुमार और राज्यसभा सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय ने तो टीएमसी के अंत की भविष्यवाणी तक कर दी है. रॉय ने कहा कि आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुए कृत्य और उसके बाद पुलिस के जरिए आरोपियों को बचाने की कोशिशों ने जनता को पार्टी का कट्टर दुश्मन बना दिया. उन्होंने कहा कि टीएमसी ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी साख पूरी तरह खो दी है और अब कुछ ही दिनों में ये पार्टी पूरी तरह बिखर जाएगी.
नेताओं का सबसे बड़ा गुस्सा प्रशांत किशोर की बनाई कंपनी आई-पैक (I-PAC) को लेकर है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सभी पदों से इस्तीफा देते हुए अपने पत्र में लिखा कि आई-पैक जैसी बाहरी एजेंसियों के अलोकतांत्रिक प्रभाव ने पार्टी को बर्बाद कर दिया. आरोप लग रहे हैं कि आई-पैक ने ममता बनर्जी तक सीनियर नेताओं की पहुंच बंद कर दी थी और पैसों के बदले पार्टी के टिकट और पद बेचे जा रहे थे.
वहीं पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी ने भी इस करारी हार के लिए ममता और अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है. हालांकि, डैमेज कंट्रोल के लिए टीएमसी ने बगावत करने वालों पर कार्रवाई के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है और प्रवक्ता रिजु दत्ता को 6 साल के लिए सस्पेंड कर दिया है, लेकिन बंगाल की राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि सत्ता जाते ही टीएमसी का ये किला अब पूरी तरह ढहने की कगार पर पहुंच चुका है.
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-भारत एक्सप्रेस
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