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सिंगरौली का ‘दाऊद इब्राहिम’: जेल में बैठकर रची 15 करोड़ की डकैती, अंदर से ही लिखी बैंक लूट की पूरी स्क्रिप्ट

मध्य प्रदेश के सिंगरौली में दिनदहाड़े हुई बैंक डकैती ने सबको चौंका दिया था. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरी वारदात का मास्टरमाइंड जेल में बंद अपराधी सुबोध सिंह है, जिसने सलाखों के पीछे से ही लूट का पूरा खाका तैयार किया और अपने गुर्गों से वारदात को अंजाम दिलवाया.

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Singrauli Bank Robbery: सिंहरोली की बैंक ऑफ महाराष्ट्र डकैती मामले में पुलिस ने जब कड़ियां जोड़ना शुरू की, तो एक ऐसी कहानी सामने आई जो किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है. यह मामला सिर्फ एक बैंक लूट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने हमारे जेल सिस्टम की सुरक्षा और वहां चल रहे ‘क्राइम सिंडिकेट’ की पोल खोलकर रख दी है. पुलिस की तफ्तीश में पता चला है कि इस पूरी डकैती की प्लानिंग और लूट के पैसों का बंदरबांट कहीं और नहीं, बल्कि जेल की सलाखों के पीछे से हो रहा था.

बिहार से ओडिशा तक फैला नेटवर्क

सिंगरौली पुलिस ने जब बिहार के नालंदा में दबिश दी, तो चंदन उर्फ चईया यादव और गुलशन यादव नाम के दो युवक हत्थे चढ़े. दिखने में ये लड़के कम उम्र के हैं, लेकिन इनके कारनामे बड़े-बड़ों को हैरान कर देने वाले हैं.

पूछताछ में जो सच सामने आया उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए. पता चला कि डकैती को अंजाम देने के बाद, करीब डेढ़ लाख रुपये और जरूरी सामान ओडिशा की संबलपुर जेल में बंद एक कैदी, पीयूष जायसवाल तक पहुंचाए गए थे. यानी वारदात सड़क पर हुई, लेकिन उसका रिमोट कंट्रोल जेल के भीतर बैठा ‘फंटूस’ और उसके साथी थामे हुए थे.

जब जेल के बिस्तर से मिला मोबाइल और कैश

इस इनपुट के आधार पर पुलिस ने 5 मई की सुबह 5 बजे ओडिशा की जेल में अचानक छापेमारी की. वहां नजारा हैरान करने वाला था. जेल के अंदर, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहां पीयूष जायसवाल के बिस्तर से ₹25,000 से ज्यादा की नकदी, एक मोबाइल फोन और कुछ संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए. सवाल यह उठता है कि आखिर जेल के सख्त पहरे के बीच ये चीजें अंदर कैसे पहुंचीं? क्या जेल अब सुधार गृह के बजाय अपराधियों का ‘कंट्रोल रूम’ बन गई हैं?

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सिस्टम पर बड़े सवाल

जांच का दायरा सिर्फ ओडिशा तक ही नहीं थमा, पुलिस की टीमें पटना की बेऊर जेल भी पहुंचीं, जहां इस गैंग के सरगना सुबोध से जुड़े अहम सुराग हाथ लगे. इस गिरोह में फंटूस, कमलेश, पंकज और राजेश जैसे कई शातिर नाम शामिल हैं, जो एक संगठित तरीके से अपराध का साम्राज्य चला रहे हैं.

सिंगरौली एसपी मनीष खत्री के नेतृत्व में पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ें खोदने में जुटी है. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है. अगर अपराधी जेल के अंदर से ही डकैती जैसी बड़ी वारदातों को मैनेज कर रहे हैं और बाहर पैसा भिजवा रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या?

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-भारत एक्सप्रेस



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