Slope First Policy India (एआई इमेज)
Slope First Policy India: पहाड़ों की घुमावदार सड़कों पर सफर करना अब आसान और सुरक्षित होगा. केंद्र की मोदी सरकार ने हिमालयी और संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण को लेकर पुरानी प्रक्रिया को बदलने के लिए नई ‘स्लोप फर्स्ट पॉलिसी’ लागू कर दी है. इस नई नीति के तहत अब किसी भी पहाड़ों में सड़क निर्माण करने या पहाड़ काटने से पहले ढलान को स्थिर करना जरूरी होगा.
इस समय पहाड़ों में अगर रोड बनाया जाता है तो पहले सड़क का निर्माण किया जाता है और उसके बाद सुरक्षा काम जैसे रिटेनिंग वॉल या ब्रेस्ट वॉल बनाया जाता है. जिसके चलते पहाड़ की नींव कमजोर हो जाती है और बारिश के समय में लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है.
ऐसे में अब मोदी सरकार की नई नीति पहाड़ों में रोड निर्माण को और सुरक्षित और सफर को आसान बनायेगी. परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि नई नीति में सड़क से पहले ढलानों को आधुनिक तकनीकों जैसे रॉक बोल्टिंग, शॉट क्रीटिंग और जियो-ग्रिड के माध्यम से सुरक्षित करना होगा. इसके अलावा ड्रोन और सेंसर के जरिये इसकी निगरानी करनी पड़ेगी कि कहीं पहाड़ की नींव कमजोर तो नहीं हो रही है.

नई नीति के तहत ये नियम अनिवार्य होंगे-
- स्लोप ट्रीटमेंट सर्टिफिकेट के बिना किसी भी ढलान से जुड़ी परियोजना की शुरुआत नहीं की जा सकेगी.
- ड्रोन और सेंसर की मदद से ढलानों की स्थिरता पर लगातार नजर रखी जाएगी.
- मानसून आने से पहले सभी ढलानों पर रॉक बोल्टिंग का काम पूरा किया जाएगा.
- मिट्टी के कटाव और पत्थर गिरने के जोखिम को कम करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
80 प्रतिशत कम हो जाएगा भूस्खलन का खतरा
सरकार का मानना है कि इस नई नीति के लागू होने से पहाड़ी इलाकों में होने वाले भूस्खलन के मामलों में 80 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. इसकी वजह से सड़क हादसों में भी गिरावट आएगी.
पहाड़ों पर सड़क बनाना पहले सिविल इंजीनियरिंग नहीं बल्कि जियो-टेक्निकल इंजीनियरिंग का विषय है. सरकार की ‘स्लोप फर्स्ट पॉलिसी’ से ना सिर्फ पहाड़ों की उम्र बढ़ेगी, बल्कि सड़क भी टिकाऊ और मजबूत रहेगी. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने टेरी और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के साथ समझौता किया है. जो पहाड़ी इलाकों में सभी परियोजनाओं की जांच करेंगे.
हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ रही दुर्घटनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी राज्यों में खासतौर पर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर इलाकों में सड़क हादसों और भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. पिछले कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्रों में भारी नुकसान दर्ज किया गया है.
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लगभग 1,200 नए लैंडस्लाइड जोन सामने आ चुके हैं. भूस्खलन के कारण राजमार्गों पर हुए हादसों में 3,500 से ज्यादा लोगों की जान गई है. वहीं सड़कों के क्षतिग्रस्त होने और उनकी मरम्मत पर सरकार को करीब 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है.
-भारत एक्सप्रेस
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