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‘इतिहास में सिमट गए गजनी और औरंगजेब, सोमनाथ मंदिर आज भी खड़ा’… सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में बोले पीएम मोदी

Somnath Swabhiman Parv: पीएम मोदी रविवार को सोमनाथ मंदिर में आयोजित स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए. उन्होंने 108 अश्वों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा में भाग लिया और वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी. इसके बाद मंदिर में पूजा-अर्चना कर जनसभा को संबोधित किया.

Somnath Swabhiman Parv: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को सोमनाथ मंदिर में आयोजित स्वाभिमान पर्व का हिस्सा बने. उन्होंने 108 घोड़ों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा में भाग लिया. यह शोभायात्रा उन वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि देने के लिए निकाली गई थी जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी. यह यात्रा शौर्य, साहस और बलिदान का प्रतीक मानी जाती है. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया.

पीएम मोदी ने क्या कहा?

पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन एक सुखद संयोग लेकर आया है. सोमनाथ मंदिर की स्वाभिमान यात्रा के एक हजार साल पूरे हो रहे हैं और साथ ही 1951 में हुए इसके पुनर्निर्माण के भी 75 साल पूरे हो रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि यह पर्व सिर्फ विध्वंस की याद नहीं है, बल्कि हजार साल की यात्रा और भारत के अस्तित्व व अभिमान का पर्व है.

‘विजय और पुनर्निर्माण का प्रतीक ‘

गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास पराजय और विनाश का नहीं है, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है. यह हमारे पूर्वजों के पराक्रम, त्याग और बलिदान का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि आक्रांता आते रहे, लेकिन हर युग में सोमनाथ फिर से स्थापित हुआ. दुनिया के इतिहास में ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है.

‘आस्था और भगवान शिव के लिए सब कुछ न्योछावर’

मोदी ने कहा कि एक हजार साल पहले इसी स्थान पर हमारे पुरखों ने अपनी आस्था और भगवान शिव के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया था. उस समय आततायी सोचते थे कि उन्होंने हमें जीत लिया है लेकिन आज भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहराती ध्वजा पूरी दुनिया को हिंदुस्तान की शक्ति और सामर्थ्य का संदेश दे रही है.

‘कई आक्रांताओं ने सोमनाथ पर हमला किया’

प्रधानमंत्री ने कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक कई आक्रांताओं ने सोमनाथ पर हमला किया. उन्हें लगता था कि उनकी तलवार सनातन आस्था को जीत लेगी लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि ‘सोम’ यानी अमृत से जुड़ा सोमनाथ हलाहल को पीकर भी अमर रहने का विचार है. सदाशिव महादेव के रूप में यहां चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है, जो कल्याणकारी भी है और प्रचंड तांडव का स्रोत भी.

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‘मजहबी आक्रंताओं की मंशा इतिहास बन गई’

मोदी ने कहा कि सोमनाथ में विराजमान महादेव का एक नाम मृत्युंजय है, जिसने मृत्यु को भी जीत लिया. सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है. उन्होंने कहा कि मजहबी आक्रांताओं की मंशा आज इतिहास के पन्नों तक सिमट गई है, जबकि सोमनाथ मंदिर समुद्र किनारे गगनचुंबी धर्मध्वजा के साथ अडिग खड़ा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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