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एक नेता ऐसा भी! सरकार ने ‘कब्जाई’ जमीन तो खुद ट्रैक्टर लेकर खेत जोतने उतर गए सांसद सुधाकर सिंह

Sudhakar Singh Piprakothi Protest: मोतिहारी में शुक्रवार को गजब नजारा देखने को मिला. यहां पर बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल के सांसद खुद ट्रैक्टर पर खेत जोतते नजर आए. उन्होंने किसानों के पक्ष में सरकार द्वारा ली गई जमीन पर खेत जोतकर किसानों के साथ विरोध जताया.

Sudhakar Singh Piprakothi Protest

Sudhakar Singh Piprakothi Protest

Sudhakar Singh Piprakothi Protest: मोतिहारी में शुक्रवार को गजब नजारा देखने को मिला. यहां पर बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल के सांसद खुद ट्रैक्टर पर खेत जोतते नजर आए. उन्होंने किसानों के पक्ष में सरकार द्वारा ली गई जमीन पर खेत जोतकर किसानों के साथ विरोध जताया. इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की जमीन पर अवैध कब्जा कर रही है. यह किसी भी तरह से जायज नहीं है. उन्होंने सरकार से जमीन वापस करने की मांग की.

दरअसल पूर्वी चंपारण जिले के पिपराकोठी में बिहार सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने किसानों की जमीन को अवैध कब्जा घोषित कर दिया. किसानों ने जिला प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध कर दिया. बिहार सरकार इस जमीन पर वॉटर पार्क बनाना चाहती है. किसानों का कहना है कि यह जमीन उनकी है और वो इसे कई सालों से जोत रहे हैं.

जब्त जमीन पर बनेगा वाटर पार्क

जानकारी के अनुसार कुछ दिनों पहले जिला प्रशासन ने पिपराकोठी में लगभग 11 बीघा से ज्यादा जमीन की नापी कराई थी. इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच जमकर झड़प भी हुई थी. पुलिस ने किसानों को लाठीचार्ज कर खदेड़ दिया था. जमीन की नापी के बाद यहां पर जिला प्रशासन ने वाटर पार्क बनाने का काम भी शुरू कर दिया था.

किसान अपनी जमीन वापस लेने के धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों के इसी प्रदर्शन को देखते हुए शुक्रवार को राजद सांसद सुधाकर सिंह पहुंचे और सरकार के द्वारा जब्त जमीन पर ट्रैक्टर चलाकर विरोध जताया.

अंग्रेजों की तरह जुल्म कर रही सम्राट सरकार

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने इस दौरान बिहार की सम्राट सरकार पर अंग्रेजों की तरह जुल्म करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के पास किसानों की जमाबंदी रद्द करने का अधिकार नहीं है. कानून में यह साफ लिखा है कि 60 साल से ज्यादा पुराना कोई दखल है तो उसकी जमाबंदी नहीं तोड़ी जा सकती है.

सुधाकर सिंह ने कहा कि चंपारण की धरती आंदोलन की धरती है. यहां खुद नील की खेती करने वाले किसानों की पीड़ा को देख महात्मा गांधी आंदोलन करने पहुंचे थे. उस समय किसी को नहीं मालूम था कि ब्रिटिश सत्ता इस आंदोलन से उखड़ जाएगी और देश से अंग्रेजों को भागना पड़ेगा.

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उन्होंने बिहार की सम्राट चौधरी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पर किसानों की जमीन हड़पने के लिए षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर से खेत जोतकर वो बिहार सरकार को यह संदेश दे रहे हैं कि यह किसानों की जमीन है और इसे वो किसी भी कीमत पर हड़पने नहीं देंगे.

-भारत एक्सप्रेस



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