छत्तीसगढ़ नान घोटाला मामले में कथित आरोपी पूर्व एडवोकेट जनरल सतीश चंद्र वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने पूर्व एडवोकेट जनरल सतीश चंद्र वर्मा को अग्रिम जमानत देते हुए जांच में सहयोग करने के लिए कहा है. मामले की सुनवाई के दौरान सतीश वर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने कहा कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह गलत निष्कर्ष निकाला है कि हिरासत में पूछताछ की जरूरत थी.
इससे पहले कोर्ट ने वर्मा के खिलाफ एफआईआर पर कार्रवाई करने पर रोक लगा दिया था. पिछली सुनवाई में पूर्व एजी वर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि उन्हें केवल इसलिए परेशान किया जा रहा है क्योंकि राज्य में सत्ता बदलाव हुआ है और जो आरोप है उनके आधार पर मामला नही बनता है. एसीबी ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज नई एफआईआर के मामले में हाई कोर्ट ने वर्मा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. वर्मा की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि, महाधिवक्ता के खिलाफ असंवैधानिक रूप से केस दर्ज किया गया है.
राज्यपाल ने की महाधिवक्ता की नियुक्ति
चूंकि महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल ने की है. लिहाजा उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए धारा 17 (ए) के तहत अनुमति जरूरी है. लेकिन इस केस में सरकार ने कोई अनुमति नही ली है. सीघे तौर पर केस दर्ज किया है. 4 नवंबर को ईओडब्ल्यू /एसीबी ने सतीश चंद्र वर्मा के अलावा रिटायर्ड आईएएस डॉक्टर आलोक शुक्ला और रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा के खिलाफ भी केस दर्ज किया है. तीनों पर आरोप है कि तीनों ने प्रभावों का दुरुपयोग कर गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास किया है. इसी मामले में 2019 में ईडी ने भी केस दर्ज किया है. जिसकी जांच चल रही है. वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन अफसरों के साथ मिलकर आरोपियों को बचाने की साजिश की है. यह भी आरोप है कि उन्होंने दोनों आरोपी अफसर और जज के बीच संपर्क बनाए हुए थे.
-भारत एक्सप्रेस
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