21 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) का आयोजन किया गया. इस मौके पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि योग केवल शरीर को लचीला बनाने का तरीका नहीं है बल्कि यह भारत की प्राचीन परंपरा का अहम हिस्सा है. उन्होंने बताया कि योग इंसान को शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाने का मार्ग दिखाता है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है.
न्यायिक कार्यभार और योग का महत्व
सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतों से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी रोज़ाना भारी काम, समय की पाबंदियों और मानसिक दबाव का सामना करते हैं. ऐसे माहौल में योग उन्हें तनाव कम करने, ध्यान केंद्रित रखने और मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. उन्होंने कहा कि योग को अपनाने से कार्यक्षमता बढ़ती है और मन शांत रहता है.
आसान अभ्यास से भी लाभ
CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि योग का फायदा पाने के लिए लंबा अभ्यास या विशेष लचीलापन जरूरी नहीं है. उन्होंने बताया कि रोजाना कुछ मिनटों का प्राणायाम, ध्यान या हल्का स्ट्रेचिंग भी व्यक्ति की दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव ला सकता है. उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि योग को केवल एक दिन की रस्म न मानें बल्कि इसे अपनी रोज़मर्रा की आदत बना लें.
आयोजन की सराहना
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए रजिस्ट्री टीम की प्रशंसा की गई. अंत में सभी को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सीजेआई ने कहा कि स्वास्थ्य और सजगता को जीवन की प्राथमिकता बनाना ही असली सफलता है. उन्होंने यह संदेश दिया कि योग को अपनाकर हर व्यक्ति अपने जीवन में संतुलन और शांति ला सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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