नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश में कहा है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) रैंक तक के IPS अधिकारियों की डेपुटेशन को क्रमिक रूप से दो वर्षों में घटाया जाए, ताकि कैडर अधिकारियों को पदोन्नति के बेहतर अवसर मिल सकें.
23 मई को न्यायमूर्ति अभय एस. ओका (सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि CAPFs में कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में हो रही देरी से उनकी सेवा में ठहराव आ रहा है, जो उनके मनोबल को प्रभावित करता है.
लगभग 18,000 अधिकारियों ने 2009 से गृह मंत्रालय (MHA) को आवेदन देकर इन बलों को ‘ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस (OGAS)’ के रूप में मान्यता देने की मांग की थी. उनका कहना था कि यदि इन बलों को OGAS माना जाए, तो समय पर पदोन्नति नहीं मिलने की समस्या और रैंक में ठहराव जैसी समस्याओं का समाधान हो सकेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि CAPFs को OGAS माना गया है, इसलिए OGAS को मिलने वाले सभी लाभ CAPFs को भी मिलने चाहिए. ऐसा नहीं हो सकता कि उन्हें कुछ लाभ तो मिलें और कुछ न मिलें.
IPS अधिकारियों की नियुक्ति बनी बाधा:
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, IG रैंक तक के पदों पर IPS अधिकारियों की नियुक्ति होने के कारण कैडर अधिकारियों के लिए पदोन्नति की संभावना कम हो जाती है, जिससे सेवा में ठहराव आता है. lateral entry के कारण वे समय पर पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2020 में दिए गए शीर्ष अदालत के आदेश को छह महीने के भीतर लागू किया जाए। इससे संबंधित लंबित शिकायतों का भी निपटारा किया जाए.
गृह मंत्रालय का पक्ष:
MHA ने अपनी दलील में कहा था कि IPS अधिकारी इस संरचना का “महत्वपूर्ण” हिस्सा हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कैडर अधिकारियों के हक में फैसला दिया. यह फैसला CAPFs के हजारों अधिकारियों के लिए राहत और उम्मीद की किरण लेकर आया है, जो वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा में हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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