नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में निलंबित दिल्ली सरकार के अधिकारी प्रेमोदय खाखा की पत्नी को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता एक साल बाद निचली अदालत में जमानत याचिका दाखिल कर सकती है.
अगस्त 2023 से जेल में है आरोपी
प्रेमोदय खाखा पर एक नाबालिग का कथित तौर पर कई बार रेप करने और उसे गर्भवती करने का आरोप है. मामले की सुनवाई के दौरान खाका की ओर से पेश वकील सुभाशीष सोरेन ने दलील दी कि आरोपी अगस्त 2023 से जेल में है और मामले में आरोप पहले ही तय हो चुके है. वहीं दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी गंभीर है. लिहाजा जमानत याचिका खारिज किया जाए. पिछले साल 6 सितंबर को प्रेमोदय खाखा की पत्नी सीमा रानी खाखा की पत्नी को यह कहते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया था कि यह मामला दो परिवारों के बीच विश्वास की जड़ पर प्रहार को दर्शाता है और इस स्तर पर गवाहों को प्रभावित करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने सीमा रानी खाखा के जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि वह मूकदर्शक नहीं थी. बल्कि उसकी सक्रिय भूमिका थी. इस संबंध में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम एवं भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.
पैनिक अटैक के इलाज के दौरान सामने आया केस
प्रेमोदय खाखा पर नवंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच एक नाबालिग लड़की से कई बार कथित तौर पर बलात्कार करने का आरोप लगाया गया है और अगस्त 2023 में गिरफ्तार होने के बाद वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है. इस घटना की जानकारी तब हुई जब पीड़िता ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस अस्पताल में पैनिक अटैक का ईलाज करने के दौरान एक चिकित्सक को आपबीती सुनाई थी. मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अदालत ने संज्ञान लेकर मामला शुरू किया था.
ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के अधिकारियों द्वारा भू मालिकों को दिए गए अवैध मुआवजे की जांच का दिया आदेश
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

