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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के 70 वकीलों को वरिष्ठ पद दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका को किया खारिज

कोर्ट ने याचिका में लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए कहा था कि इसमें न्यायधीशों के खिलाफ आरोप लगाए गए है. हमें लगता है कि संस्था के खिलाफ कई तरह के अपशब्द और निराधार आरोप लगाए गए हैं.

Waqf Amendment Bill
Edited by Akansha

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के 70 वकीलों को वरिष्ठ पद दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मैथ्यूज जे नेदुम्परा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद फैसला दिया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने नेदुम्परा को फटकार लगाते हुए पूछा था कि आप कितने न्यायाधीशों के नाम बता सकते हैं, जिनके बच्चों को वरिष्ठ वकील के रूप में नामित किया गया है.

कोर्ट ने आरोपों को हवाला देते हुए कही ये बात

कोर्ट ने याचिका में लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए कहा था कि इसमें न्यायधीशों के खिलाफ आरोप लगाए गए है. हमें लगता है कि संस्था के खिलाफ कई तरह के अपशब्द और निराधार आरोप लगाए गए हैं. बता दें कि लगभग 3.5 साल बाद हाई कोर्ट ने 70 वकीलों को सीनियर का दर्जा दिया है. मुख्य न्यायाधीश मनमोहन अगले दो वरिष्ठतम न्यायधीशों, विभु बाखरु और यशवंत वर्मा, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर नंदराजोग और मोहित माथुर की एक स्थायी समिति द्वारा उम्मीदवारो का मूल्यांकन करने के बाद सीनियर का दर्जा दिया गया.

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सीनियर एडवोकेट सुधीर नंदराजोग ने दिया इस्तीफा

समिति के सदस्य, सीनियर एडवोकेट सुधीर नंदराजोग ने समिति आए इस्तीफा दे दिया. उन्होंने दावा किया कि अंतिम सूची उनके सहमति के बिना तैयार की गई थी. बता दें कि इसके लिए 300 आए अधिक वकीलों ने आवेदन किया था, जो एक वकील की क्षमता, अदालती कौशल और कानूनी ज्ञान की मान्यता के रूप में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स द्वारा प्रदान किया जाता है. यह बेशकीमती पदनाम, जो वकीलों को अपनी कानूनी फीस में भारी वृद्धि करने की अनुमति देता है. स्थायी समिति ने हफ़्तों के साक्षात्कार के बाद 70 वकीलों को प्रदान किया गया, अंत मे एक पूर्ण अदालत की बैठक में समापन हुआ. जिसमें शॉर्टलिस्ट किए गए प्रत्येक उम्मीदवार का स्वतंत्र और स्पष्ट विश्लेषण देखा गया.

-भारत एक्सप्रेस 


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