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बंगाल का सियासी दांव: ममता के बाद शुभेंदु अधिकारी की SIR पर नजर, चुनाव आयोग से क्या मांगा?

Suvendu Adhikari On SIR: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है. इससे पहले नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने एक मांग रख दी है.

Suvendu Adhikari Election Commission Durga Puja SIR

Suvendu Adhikari On SIR: पश्चिम बंगाल की राजनीति में त्योहारों और धार्मिक आयोजनों का हमेशा से एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है. जहां एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अक्सर इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं, वहीं अब विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी पूजा का दांव चला है. उन्होंने चुनाव आयोग से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के लिए दुर्गा पूजा को ध्यान में रखने की मांग की है. यह मांग न केवल एक धार्मिक अपील है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक चाल भी छिपी हुई है, जिसका सीधा निशाना टीएमसी है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से अपील की है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान दुर्गा पूजा उत्सव को ध्यान में रखा जाए. उन्होंने कहा कि इस त्योहार में किसी भी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और राज्य के बीएलओ भी अपने-अपने घरों में हिंदू धर्म के अनुसार अनुष्ठानों का संचालन करेंगे.

‘टीएमसी होगा सत्ता से बेदखल’

शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि भाजपा इस बार पश्चिम बंगाल की जनता के साथ मिलकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया से टीएमसी को सत्ता से बेदखल करने के लिए लड़ रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं के नाम बीएलओ के रूप में शामिल किए गए हैं, जिसे भाजपा ने 29 अगस्त को सर्वदलीय बैठक में उठाया था.

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चुनाव आयोग का काम संतोषजनक

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि चुनाव आयोग की गतिविधियां संतोषजनक है और वे जल्द से जल्द एसआईआर शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने तुरंत 1700 बूथों के पुनर्गठन का प्रस्ताव पेश किया है, जो विपक्षी दल के रूप में अपनी गतिविधियां चला रही है.

पश्चिम बंगाल में SIR का सियासी रंग

शुभेंदु अधिकारी की यह मांग, सतही तौर पर भले ही धार्मिक भावनाओं को दर्शाती हो, लेकिन यह बंगाल की राजनीति की गहरी समझ को भी दिखाती है. दुर्गा पूजा के दौरान एसआईआर प्रक्रिया में बाधा पड़ने से टीएमसी के उन कार्यकर्ताओं की पहचान करना मुश्किल हो सकता है, जिन्हें बीएलओ के रूप में नियुक्त किया गया है. यह एक ऐसा कदम है, जो बीजेपी को सोनार बांग्ला के लिए अपनी लड़ाई में एक बड़ा फायदा दे सकता है. यह बयान यह भी साबित करता है कि बंगाल की राजनीति में अब हर मुद्दा, चाहे वह धार्मिक हो या प्रशासनिक, सियासी रंग में रंग चुका है.



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